ईंट भट्ठे, कारखाने व वाहनों के धुंए और निकलने वाले कचरे से वायुमंडल व जल स्रोतों में फैल रहा खतरनाक जहर
गोंडा। जिले में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई कार्य नहीं हो रहा है। जिले में धधकते ईंट भट्ठे, चीनी मिलों से निकलते धुंए वायुमंडल में जहर घोल रहे हैं।
इसके अलावा चीनी मिलों से निकलने वाला पानी जल स्रोतों को जहरीला बना रहा है। वहीं पुराने खटारा वाहनों से निकल रहा काला धुंआ शहरी आबादी के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। पिछले दो दशक से वाहनों की बिक्री में तेजी से इजाफा हुआ है। इससे शहरी इलाके में लोग सांस की बीमारी से परेशान हैं।
बड़े वाहनों के बढ़ने से रोड पर लोड बढ़ा है। हर दो मिनट में वाहनों के गुजरनेे से उसके धुएं के अलावा उड़ने वाली धूल भी लोगों के सेहत के लिए मुसीबत बनी है। लेकिन इस तरह के प्रदूषण की जांच रोकधाम पर नियम के खिलाफ कार्य करने वालों पर कार्रवाई करने वाले विभाग का जिले में कोई प्रभावी तत्रं नही है।
फैजाबाद में विभाग होने से लोग अपने कार्य वहीं से कराते हैं। लेकिन विभाग की ओर से जिले में कभी कोई जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया जिससे जन सामान्य को लाभ हो ।
जिले में कुल ईंट भट्ठे- 250
ऊंची चिमनी वाले भट्ठे- 250
जिले में चीनी मिलें - 03
प्रदूषण बोर्ड का नही दिख रहा कार्य
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दफ्तर फैजाबाद में है। प्रदूषण नियंत्रण के बाबत सभी तरह के कार्य वहीं होते हैं। जिले में इस विभाग की कोई शाखा या यूनिट काम नही कर रही है। जिन्हें लाइसेंस आदि लेना होता है वे सीधे ऑनलाइन या फिर फैजाबाद जाते हैं।
पिछले कई सालों से इस बाबत विभाग की ओर से जिले में कार्य की कोई गतिविधियां सामने नही आयीं हैं। इस बाबत कलेक्ट्रेेट गोंडा के सूत्रों का कहना है कि फैजाबाद से विभाग के अधिकारी कभी कभी ईंट भट्ठों, कारखानों का सर्वे कर चले जाते हैं।
जब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ही नहीं तो कौन रोके प्रदूषण
जिले में प्रदूषण रोकने के लिए यहां प्रदूषण रोकने के लिए बोर्ड की स्थापना तक नहीं है। न तो इसका कार्यालय है और न ही नियंत्रण अधिकारी व कर्मचारी। इससे प्रदूषण पर रोक नहीं लग पा रही है। वाहनों के प्रदूषण की जांच के लिए प्राइवेट कंपनी को फ्रन्चाईजी दी गई है, लेकिन फ्रेन्चाईजी की प्रदूषण जांच मशीन अधिकतर खराब रहती है। इससे वाहनों प्रदूषण मुक्त है या प्रदूषण युक्त इसका पता लगाना भी मुश्किल है।
हर साल बढ़ते 1700 वाहन
वाहनों की बढ़ती संख्या के लिए शहर की सड़के सकरी हो गई हैं। वाहनों के तादात के कारण शहर में हर जगह जाम की समस्या हो रही है। ऐसे में हर साल 15 सौ दो पहिया व सौ चौपहिया वाहन सड़कों पर ट्रैफिक में शामिल हो रहे हैं। वाहनों की तादात बढने से प्रदूषण भी बढ़ रहा है। संभागीय परिवहन नियमों के मुताबिक जो वाहन समयावधि पूरा करने के कारण कंडम हो गए हैं, वह भी जहर उगलते सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
वाहनों के प्रदूषण की समस समय से जांच कराई जा रही है। जो लोग बहुत पुराने वाहनों को चलाते है उनका चालान किया जाता है। इस बाबत जल्द ही अभियान चला कर जांच करायी जाएगी।-राजीव कुमार चतुर्वेदी, आरटीओ गोंडा