गोंडा। खेतों अवशेष फसलों को जलाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़े कदम उठाए हैं। यदि किसी किसान ने खेत में पराली जलाया और उससे वायू प्रदूषण उत्पन्न हुआ तो उन पर जुर्माना लगेगा। उन्होंने इसकी रोकथाम के लिए थानावार प्रधान, किसान, लेखपाल सहित अन्य जुड़े विभागों की एक साथ बैठक करने का निर्देश दिया है।
जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि थाना स्तर पर ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य, लेखपाल, कृृषि विभाग, उद्यान विभाग, पशु पालन विभाग, ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारी के साथ-साथ प्रगतिशील कृषकों व अन्य विभागों के फील्ड स्तरीय कर्मचारी एवं ग्राम चैकीदारों को भी बुलाया जाय।
बैठक में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों की जानकारी देते हुए फसल अवशेष को जलाए जाने को दण्डनीय अपराध बताते हुए समस्त कृृषकों को जागरूक किया जाय। जिससे राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने किसानों को फसल अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के संबंध में जागरूक करने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर होर्डिंग्स एवं विज्ञापन पट्ट लगाने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अन्तर्गत कृृषि अपशिष्टों को जलाने के लिए दोषी व्यक्तियों को अर्थदंड देने का प्राविधान किया गया है। जिसके तहत कृृषि भूमि का 2 एकड़ से कम क्षेत्रफल होने पर ढाई हजार रुपये प्रति घटना, 2.5 एकड़ क्षेत्रफल होने पर 5 हजार रुपये प्रति घटना तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर 15 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।