गोंडा। राजकीय नवीन गल्लामंडी में जहां किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए रखना होता है वहां पर आढ़ती कब्जा किए हैं। ऐसे में किसान अपने वाहनों पर ही उपज रखकर आढ़तियों के निर्धारित रेट पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। प्रशासनिक अधिकारी किसानों की इस पीड़ा से अंजान बने हुए हैं।
मूल्य समर्थन योजना के तहत इस बार धान का समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सरकारी मंडी में ही किसानों की उपज की लूट मची है। किसानों का हजारों क्विंटल धान यहां के आढ़ती 1100-1200 रुपये प्रति क्विंटल रुपये में खरीद चुके हैं।
आढ़तियों से साठगांठ करने वाले अधिकारी एक दिन भी मंडी नहीं गए और न किसी आढ़ती से ये पूछा कि किसान की उपज निर्धारित समर्थन मूल्य से कम पर क्यों खरीदी जा रही है। ऐसे में किसानों को 600-700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
धान खरीद के लिए जिले के केंद्रों को लक्ष्य तय किया गया है। चार लाख के करीब किसानों से धान खरीदने की व्यवस्था की गई है। अभी तक जिले के सरकारी धान खरीद पर नजर दौड़ाएं तो हकीकत चौंकाने वाली है। लंबे प्रयास के बाद भी अब तक 487 किसानों से सिर्फ 2090 मीट्रिक टन धान की खरीद हो पाई है।
ऐसा तब है जब किसानों से 61 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद होनी है। इस आंकड़े से साफ हो रहा है कि सरकारी स्तर पर धान खरीद की प्रक्रिया काफी धीमी गति से हो रही है और केंद्रों पर किसानों से धान की खरीद आसानी से नहीं हो रही है। ऐसे में लक्ष्य पूरे होने के आसार भी नहीं दिख रही है।
किसानों के सामने भी बेचैनी है कि आखिर वह क्या करें, किसान शीतला प्रसाद तिवारी कहते हैं कि केंद्रों पर जाने पर बहुत प्रक्रिया बताई जा रही है। पहले ऑनलाइन करो, फिर सत्यापन कराओ और फिर धान की क्वालिटी की बात कही जाती है। ऐसे में आढ़तियों को ही धान बेचना पड़ रहा है। सरकार की ओर से ऐसी व्यवस्था है कि जिससे परेशानी हो रही है।
किसान रमेश कुमार कहते हैं कि केंद्रों पर धान की जांच करने में काफी नुकसान होता है। काफी धान उड़ जाता है और उसे जोड़ते भी नहीं हैं। इससे बेवजह धान का वजन कम हो जाता है। ऐसे में धान बेचने में दिक्कत आती है। सरकारी क्रय केंद्र पर धान खरीदने के लिए प्रशासन चाहे तो मौके पर अधिकारियों की टीम लगाकर रजिस्ट्रेशन करवा सकता है लेकिन यहां केवल बैठक तक अधिकारियों की धौंस दिखाई दे रही है। मॉनीटरिंग के लिए जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी, डीएसओ, डिप्टी आरएमओ सहित सभी उपजिलाधिकारियों को लगाया है।
ग्यारह सौ से तेरह सौ के भाव से ही बिकता धान
किसान गिरीश कुमार ने बताया कि मंडी में धान की बानगी लेकर आये थे। आढ़तियों ने बताया कि धान बहुत पतला है 11 सौ से साढ़े 11 सौ प्रति क्विंटल तक खरीद सकते हैं। वहीं राघव राम ने बताया कि मंडी में आढ़तियों द्वारा अधिकतम तेरह सौ रुपये क्विंटल तक का भाव दिया जा रहा है। श्यामू ने बताया कि गांव में 11 सौ व मंडी में 13 सौ प्रति क्विंटल के भाव से व्यापारी धान खरीदते हैं।
मंडी के अधिकारियों ने दो चबूतरों को उठा दिया किराए पर
मंडी में किसानों के लिए तीन चबूतरे बने हुए हैं। इन चबूतरों पर केवल किसान अपनी उपज रखेगा और उसकी बोली आढ़ती लगाएंगे ऐसा नियम है। लेकिन किसानों के चबूतरे पर आढ़ती का कब्जा है। और किसान ट्रॉलियों पर ही अपनी उपज रखकर मंडी में आढ़तियों से बेचने की मिन्नतें करता है। मंडी में एक चबूतरे पर सरकारी क्रय केंद्र खोल दिया गया है, जबकि दो चबूतरों को मंडी के अधिकारियों ने किराए पर उठा दिया है। इन चबूतरों के एवज में आढ़ती अपनी खरीद रखते हैं और हर माह किराया जमा करते हैं।
आयुक्त की कार्रवाई के बाद भी नहीं हुआ केंद्रों पर सुधार
आयुक्त एसवीएस रंगाराव ने बीते दिनों कई केंद्रों का निरीक्षण किया। एक सचिव के विरुद्ध लापरवाही बरतने पर कार्रवाई भी की। इसके बावजूद केंद्रों पर सुधार नहीं दिख रहा है। किसानों को परेशान करने के लिए हर केंद्र पर एक मशीन रखे हैं जिससे धान की जांच करते हैं। पंखे से धान को परखते हैं और इसमें किसानों के हल्के धान उड़कर दूसरी तरफ गिरते हैं। बाद में किसानों के वही धान आढ़त पर बेच दिए जाते हैं। अब किसान भी सीधे आढ़त के यहां ही धान बेंचने लगे हैं।
चार केंद्रों पर पांच किसानों ने ही बेचा मक्का
मक्का के किसानों से भी खरीद केंद्रों पर नहीं हो रही है। जिले में चार मक्का क्रय केंद्र तो खोल दिए गए लेकिन किसानों से केंद्र जुड़ नहीं पाए हैं। अभी तक विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो सिर्फ 5 किसानों ने ही 21 मीट्रिक टन मक्का की ही बिक्री किए हैं। इससे स्पष्ट है कि केन्द्रों का संचालन सिर्फ नाम मात्र का चल रहा है। वहां भी स्थानीय व्यापारी हावी है। किसानों की समस्याओं को भी नही सुना जा रहा है।
मंडी में गेट पर ही किसानों के उपज की नीलामी करा ली जाती थी। किसानों के लिए तय चबूतरे पर अभी क्रय केंद्र संचालित है। किसानों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता है।
- अजीत चौधरी, सचिव मंडी परिषद
क्रय केंद्रों पर किसानों से धान खरीद की नियमित समीक्षा की जाती है। किसानों की समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को उपज बेचने के लिए प्रेरित किया जाता है।
- लाल बहादुर गुप्ता, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी