रुपईडीह (गोंडा)। जिले के दर्शनीय तीर्थ स्थलों में मनोरमा या मनवर का बहुत महत्व है। प्राकृतिक सौंदर्य की प्रतीक और महर्षि उद्वालक की तपोस्थली तिर्रेमनोरमा आस्था का केंद्र है। यहीं से मनवर नदी का उद्गम हुआ है जो जिले के 125 गांवों के लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। यह नदी तिर्रेमनोरमा से होते हुए मनकापुर से बस्ती बढ़ते-बढ़ते विशाल रूप ले लेती है और सरयू में समाहित हो जाती है। इस ऐतिहासिक स्थल से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। यहां प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णमासी पर मेले का आयोजन होता है।
मंगलवार को मनवर नदी के तट पर तिर्रेमनोरमा में ऐतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा मेले में लाखों लोग स्नान करेंगे। कहा जाता है कि यहां पूजन-अर्चन से लोगों के मन की मुराद पूरी होती है। गांव को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी गोंडा के राजा महाराजा देवी बख्श सिंह ने बसाया था। यह स्थल राजपूतों के शौर्य से भी जुड़ा है। शहर से 14 किमी दूरी पर स्थित तिर्रेमनोरमा गांव में मंगलवार को सबसे बड़ा मेला लगता है। यह स्थल 84 कोसी परिक्रमा के दायरे में भी है और यह राजा दशरथ के पुत्र की कामना के लिए किए गए कामेष्टि यज्ञ स्थल मखौड़ा को जोड़ता है।
इससे यहां मनोकामना पूरी होने की किवदंतियां भी हैं। इस तरह कई ऐतिहासिकता को अपने से जोड़े हुए इस स्थल का दर्शन करने के लिए लोग दूरदराज क्षेत्रों से आते हैं। तपोस्थली पर महार्षि उद्वालक की समाधि स्थल व आश्रम भी है। इसके अलावा सत्य साईं मंदिर बना हुआ है। राम-जानकी मंदिर में अनवरत पूजन होता रहता है। 100 वर्ष पहले यहां मंदिर व आश्रम का निर्माण हुआ था जिसकी अलग ही पहचान है। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, पूजन, अर्चन के अलावा खिचड़ी दान और गो दान की परंपरा है।
मेला तो सज गया पर सुविधाएं नदारद
ऐतिहासिक महत्व होने और कार्तिक पूर्णिमा के दिन करीब पांच लाख लोगों की आस्था से जुड़े स्थल की अनदेखी भी हो रही है। यहां के सरोवर की सीढ़ियां और मंदिर जर्जर हो चुकी हैं। सफाई के नाम पर कोई झांकने तक नहीं गया है। मेल तो चल रहा है लेकिन इन सुविधाओं के न होने से श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यही नही आसपास गंदगी का ढेर भी है।
मेले की व्यवस्था के लिए दिया है निर्देश
मनोरमा मेले के संबंध में उप जिलाधिकारी वीर बहादुर यादव ने कहा कि ऐतिहासिक मेले की व्यवस्था की जा रही है। राजस्व कर्मियों और अधिकारियों को लगाया गया है। पुलिस को भी सतर्क किया गया है। सभी सुविधाएं की जा रही हैं।
मंदिर में दर्शन कराने की व्यवस्था से जूझ रहे हैं पुजारी
मनोरमा स्थल पर स्थित राम जानकी मंदिर के पुजारी श्रद्धालुओं को दर्शन कराने की व्यवस्था में जुटे हैं। बड़े पुजारी बलरामदास का कहना है कि कोई व्यवस्था नहीं है। मंदिर जर्जर है। रंगाई-पुताई तक नहीं कराई गई, वे अपने स्तर से दर्शन की व्यवस्था कर रहे हैं। इसी तरह छोटे पुजारी सीताराम दास भी कहते हैं कि यहां कोई व्यवस्था ही नही है। फिलहाल व्यवस्था के लिए जुटे हैं।
तिर्रेमनोरमा के साथ ही कई थानों पर लगता है मेला
कार्तिक पूर्णमासी पर जिले में तिर्रेमनोरमा के साथ ही कई स्थानों पर मेला लगता है। नदियों के तट पर लगने वाले इस मेले का अपना अलग ही महत्व है। तिर्रेमनोरमा के साथ ही करनैलगंज के सरयू घाट, कटरा शाहबाजपुर घाट, कचनापुर घाट, पकसा व त्रिमुहानी घाट पर मेले लगते हैं। इसके साथ ही जम्बो घाट, भौरीगंज तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। मसकनवां के भगवान धनश्याम महराज की जन्म स्थली स्वामी नारायण छपिया में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं और पवित्र नारायण सरोवर में हरिभक्त डुबकी लगाते हैं। इसके अलावा बग्गी रोड़, बालपुर, ईश्वरनंद कुट्टी, डिडिसिया, पांडेय पुरवा आदि ग्रामीण इलाकों में भी मेले की धूम रहती है।