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सूकरखेत पसका संगम पर मेला कल से

Mon, 09 Jan 2017 11:23 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
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पसका में बनार्ईं कुटी - फोटो : अमर उजाला
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सूकरखेत पसका संगम स्थल पर स्नान-दान व मेले का आयोजन बुधवार से शुरू हो जाएगा। कल्पवासियों की कुटियों से संगम क्षेत्र का पूरा इलाका अब लघु प्रयाग सा नजर आने लगा है। कल्पवासियों से गुलजार मेला परिसर व संगम स्थल पर प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है। 11 जनवरी से शुरू हो रहे मेले में करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है। 
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रामचरित मानस के अमर रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने गुरु नरहरिदास जी से इसी पुण्य भूमि पसका सूकरखेत में ही दीक्षा ली थी। गुरु जी के आश्रम में आज भी हस्तलिखित रामायण के पन्ने इस स्थली की ऐतिहासिकता की आज भी गवाही दे रहे हैं।

इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने वाराह का रूप धारण कर पृथ्वी को पाप से मुक्त कराया था। इसलिए इस तपोस्थली को सूकरखेत या वाराह क्षेत्र भी कहा जाता है। पवित्र सरयू नदी के संगम तट त्रिमुहानी घाट पर बड़ी संख्या में नागा, साधु-संतों तथा गृहस्थों ने फूस की कुटिया डाल कर कल्पवास, तपस्या में लीन होकर अपना नाता परब्रह्म परमात्मा से जोड़ रखा है। कल्पवासियों की कुटियों से संगम क्षेत्र का पूरा इलाका अब लघु प्रयाग सा नजर आने लगा है। लोग इस स्थली को पूर्वांचल का प्रयाग भी कहने लगे हैं।
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पसका सूकरखेत राजापुर को रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म स्थान माना जाता है। यहां तुलसीदास जी के गुरु नरहरिदास जी का आश्रम भी है। रामचरित मानस के बालकांड में इस स्थान का उल्लेख तुलसीदास जी ने किया है।

इस स्थान पर सरयू तथा दो पवित्र नदियों का संगम भी हुआ है। इसलिए इस स्थान को संगम मेला के नाम से भी जाना जाता है। परंतु नदी पर बांध बन जाने से अब यहां संगम नहीं हो पा रहा है। इस स्थली का उल्लेख स्कंद पुराण में भी इस तरह उल्लिखित है। दशकोटि सहस्त्राणि, दश कोटि शतानि च तीर्थानि सरयू नद्या, घर्घरोदक संगमे। इसका भावार्थ यह है सरयू व घाघरा संगम तट पर हजारों तीर्थ विद्यमान हैं। रामचरित मानस के बालकांड में भी चौपाई त्रिविध ताप नाशक त्रिमुहानी का संबंध पसका सूकरखेत से ही जोड़ा गया है। इस स्थली पर लाखों लोग स्नान-दान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।

इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने वाराह का रूप धारण कर हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए इस स्थल को सूकरखेत  के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान सूकर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। भगवान विष्णु की मूर्ति आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी। करीब 31 वर्ष पूर्व 1985 में भगवान वाराह की वेशकीमती मूर्ति चोरी हो गई थी। जिसे बाद में पुलिस ने खंडित रूप में बरामद किया था। यह मूर्ति आज भी मालखाने में रखी हुई है। 28 दिसमबर 2014 को सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर मंदिर में वाराह भगवान की नई प्रतिमा स्थापित कराई थी।
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