गोंडा। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जिले में विद्युत वितरण के नए खंडों और उपखंडों की स्थापना की गई थी, किंतु अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण उपभोक्ताओं की दुश्वारियां कम होने के बजाय बढ़ गईं। पूरे जिले में एक खंड होने पर जो उपभोक्ता अपनी समस्या के समाधान के लिए 10 किमी की दूरी तय करके अधिशासी अभियंता से मिल सकते थे, अब चार खंड होने पर उन्हें 40 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है।
एक दशक पहले तक जिले में एक अधिशासी अभियंता थे। 2017 में उपभोक्ताओं को अधिक सुविधाएं देने के लिए जिले को चार भागों में बांटकर तहसील स्तर पर विद्युत वितरण खंड प्रथम, द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ का गठन कर अधिशासी अभियंता तैनात कर दिए गए। उपभोक्ता हित में किया गया यह प्रयास तब उनकी परेशानी का कारण बन गया, जब क्षेत्र बंटवारे के समय अधिकारियों ने भौगोलिक स्थिति का ध्यान नहीं रखा। परिणाम यह हुआ कि कई उपकेंद्र सुदूरवर्ती खंड मुख्यालय से संबद्ध कर दिए गए।
विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधीन संपूर्ण गोंडा शहर है। इसका मुख्यालय शहर में ही है। तरबगंज तहसील क्षेत्र को खंड द्वितीय नाम देकर इसका मुख्यालय नवाबगंज बनाया गया। इस खंड में परसपुर उपकेंद्र भी शामिल कर दिया गया, जो नवाबगंज से 40 किमी दूर है। करनैलगंज के नाम पर गठित खंड तृतीय में गोंडा सदर तहसील के आर्यनगर, खरगूपुर व सुभागपुर उपकेंद्र तथा मनकापुर में स्थापित खंड चतुर्थ में मेहनौन, इटियाथोक व धानेपुर उपकेंद्र शामिल किए गए। कई उपकेंद्रों से खंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए लोगों को दो से तीन स्थानों पर वाहन बदलना पड़ता है क्योंकि वहां से सीधे आवागमन के लिए कोई सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। कई उपखंडों के मुख्यालय बनाए जाने में भी यही विसंगति है। इस प्रकार छह से अधिक उपकेंद्रों के उपभोक्ताओं की समस्या कम होने के बजाय बढ़ गई।
दरअसल विद्युत चोरी, आरसी के मामले, कनेक्शन विच्छेदन, वाणिज्यिक कनेक्शन आदि मामलों में अधिशासी अभियंता स्तर से नीचे किसी अधिकारी को निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। ऐसी दशा में उपभोक्ताओं को हर हाल में उनके पास जाना ही होता है। मौजूदा स्थिति यह है कि नवाबगंज के नाम से स्थापित खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता भी गोंडा शहर में ही बैठते हैं। इसलिए पूरे तहसील क्षेत्र के लोग अपनी जरूरत के लिए जिला मुख्यालय आने को विवश हैं। यही हाल खंड तीन व चार में शामिल सात अन्य उपकेंद्रों के उपभोक्ताओं का भी है।
नए सिरे से पुनर्गठन का करेंगे प्रयास : मुख्य अभियंता
मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने बताया कि विभाजन के समय तत्कालीन अधिकारियों ने भौगोलिक स्थिति को ध्यान में नहीं रखा। अब यह विसंगति संज्ञान में आई है। हम मुख्यालय को विस्तार से पत्र लिखकर खंडों के पुनर्गठन का प्रयास करेंगे।
उपकेंद्र वर्तमान मुख्यालय निकटवर्ती मुख्यालय
सुभागपुर करनैलगंज (38) गोंडा (10)
खरगूपुर करनैलगंज (42) गोंडा (28)
आर्यनगर करनैलगंज (28) गोंडा (18)
इटियाथोक मनकापुर (55) गोंडा (18)
धानेपुर मनकापुर (30) गोंडा (22)
मेहनौन मनकापुर (45) गोंडा (35)
परसपुर नवाबगंज (40) करनैलगंज (14)
(नोट : सभी स्थानों की दूरी किमी. में है।)