श्रीराम कथा सुनाते राजन जी महाराज। -स्रोत: आयोजक
कटरा बाजार/दुबहा बाजार। कौड़िया के पैड़ीबरा स्थित सम्मय माता मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में प्रवाचक राजन जी महाराज ने कहा कि सेवा में जब तक भय नहीं आएगा, तब तक वह श्रेष्ठ नहीं हो सकती। भय होने पर ही जीव सतर्कता के साथ सेवा करता है। जिसका मन न हो, उससे भूलकर भी सेवा नहीं करानी चाहिए।
राजन जी महाराज ने बृहस्पतिवार को राजा जनक की सभा में धनुष टूटने, भगवान राम के पराक्रम और देवी सीता द्वारा वरमाला पहनाने के प्रसंग का सजीव वर्णन किया। इस दौरान तेरी मंद-मंद मुस्कनिया पे बलिहार राघव जी... जैसे भजनों की संगीतमय प्रस्तुति दी गई। प्रवाचक ने अयोध्या से मिथिला तक बरात की यात्रा और वहां हुए आतिथ्य सत्कार पर भी विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि प्रसन्नता से किया जाने वाला कार्य सदैव सफल होता है। सच्ची भक्ति के बिना भगवान को प्राप्त करना संभव नहीं है। भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया।