नेताजी का गोंडा से विशेष लगाव रहा है। बात 1940 की है, जब उन्होंने कानून गोयान मोहल्ले के कालिका निवास में छात्रों के साथ बैठक की थी। यहीं पर छात्र संगठन का गठन किया, जिसने बाद में स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई।आजादी के बाद नेताजी की स्मृतियों को संजोने के लिए कानून गोयान मोहल्ले का नाम बदलकर सुभाष नगर कर दिया गया। वक्त बदला। पीढि़यां बदलीं, शहर का चेहरा बदला, लेकिन कालिका निवास व सुभाष बाबू के रिश्तों में कोई तब्दीली नहीं आई। आज भी लोग इस पुराने भवन को देखकर सुभाष चंद्र बोस का जिक्र करना नहीं भूलते।
उतरौला रोड पर महाराजगंज पुलिस चौकी के सामने सुभाषनगर मोहल्ले में कालिका निवास आज भी गर्व से तना है। यहां नेताजी के करीबी रामचंद्र श्रीवास्तव उर्फ बच्चू बाबू के बेटे अधिवक्ता ज्ञानचंद्र पत्नी के साथ रहते हैं। वह कहते हैं कि हमें गर्व है कि परिवार से सुभाष बाबू का नाम जुड़ा है। पिताजी बताते थे कि वर्ष 1939-40 में एक दिन उनके पास संदेश आया कि नेताजी आपसे मिलना चाहते हैं। 21 जनवरी 1940 को नेताजी अचानक कालिका निवास पहुंच गए। औपचारिक बातचीत हुई। इस बीच उन्होंने छात्रों के साथ बैठक की मंशा जाहिर की। जुझारू छात्र नेताओं के साथ कालिका निवास में ही बैठक हुई और उसी दिन छात्र संगठन की स्थापना कर रामचंद्र श्रीवास्तव को अध्यक्ष चुन लिया गया।
15 अगस्त 1942 की अर्धरात्रि बच्चू बाबू व राजेंद्र प्रसाद ने टॉमसन इंटर कॉलेज (वर्तमान में शहीदे आजम भगत सिंह इंटर कॉलेज) व गवर्नमेंट हाईस्कूल की इमारत पर तिरंगा फहराया। ज्ञानचंद्र के अनुसार पिताजी आजादी के बाद समाज में बदलाव लाने की मुहिम चलाते रहे। आज भी पूरा परिवार नेताजी को अपना आदर्श मानता है।
नेताजी की यादों को ताजा करता है तखत
ज्ञानचंद्र कहते हैं कि आज भी उनके घर में वह तखत मौजूद है, जिसपर बैठकर नेताजी ने छात्रों के साथ बैठक की थी। कई बार लोगाें ने तखत बेचने की बात कही। अच्छी रकम भी देने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्हाेंने मना कर दिया।
युवा सोच के संस्थापक अनिल सिंह कहते हैं कि नेताजी व उनसे जुड़े लोग आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वह घर युवाओं के लिए किसी मंदिर से कम नहीं है, जहां पर नेताजी के कदम पड़े थे। उनकी स्मृतियों को संजोने की जिम्मेदारी हर किसी की है।