करनैलगंज/विश्नोहरपुर। सरयू नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। नवाबगंज के साकीपुर के चहलावा व शुकुलपुरवा मेें कटान तेज है। खेती नदी में समा रहे हैं। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से अभी भी 11 सेंटीमीटर ऊपर है। पानी का डिस्चार्ज 3.21 लाख क्यूसेक है।
जलस्तर घटने के कारण कटान तेज होने से 50 बीघे खेत नदी में समा गए हैं। ग्राम नकहरा, घरकुइयां, बहुवन मदार मांझा, मांझा रायपुर, पारा, बेहटा के किसानों के खेतों में कटान हो रहा है। ग्राम बहुवन मदार मांझा, चंदापुर किटौली, नकहरा, घरकुइयां के किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। इन गांवों के अधिकांश किसानों के खेत बांध के अंदर हैं और वह इलाका बाराबंकी जिले में आता है। बाराबंकी प्रशासन अपने जिले के बाढ़ पीड़ितों की मदद करता है, लेकिन उक्त किसानों को कोई मदद नहीं मिल पाती है। शुक्रवार को भी पारा, बेहटा, मांझा रायपुर, बहुवन मदार मांझा, चंदापुर किटौली, नकहरा, घरकुइयां के सामने तेजी से कटान हुआ। इससे धान, गन्ना, मक्का के खेत कटकर नदी में समाते रहे। गांवों की बाढ़ अब नियंत्रण में है। बाढ़ का पानी निकल चुका है, लेकिन नाले, तालाब व गांवों के किनारे गड्ढों में पानी भरा है।
नवाबगंज के गांवों में आवागमन सामान्य हो गया है। ब्योंदा माझा गांव अब भी प्रभावित है। लोगों के घर सुरक्षित हैं, लेकिन मजरे के चारों तरफ पानी भरा है। ब्योंदा बाजार से गांव जाने वाले मुख्य मार्ग पर अब भी जलमग्न है। लोग नाव से आवागमन कर रहे हैं। दत्तनगर में बाढ़ के चलते छह सड़कें खराब हो गई हैं। ढेमवा चौकी के पास पुलिया भी कट गई है। नान्हू यादव का छप्पर बाढ़ में कट गया। एसडीएम करनैलगंज जितेंद्र गौतम का कहना है कि बाढ़ की निगरानी के लिए राजस्व टीम मुस्तैद है। अब बाढ़ नियंत्रण में है। कहीं कोई समस्या नहीं है।