करनैलगंज। सरयू नदी में पानी घटने के साथ ही कटान तेज हो गया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर है। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां अभी कम नहीं हो रही हैं। विभिन्न बैराजों से 3.14 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा है।
जिले के ग्राम बहुवन मदार मांझा, चंदापुर किटौली, घरकुइयां के ग्रामीणों की भूमि जो बांध के अंदर है वह कटान की जद में है। सबसे तेज कटान गोंडा-बाराबंकी जिले की सीमा पर बसे ग्राम पारा, बेहटा, मांझा रायपुर, परसावल, नेपुरा, कमियार में हो रहा है। गांव से पानी निकल गया है। मगर कीचड़, दलदल से लोगों का आवागमन बंद है। बहुवन मदार मांझा के पास जहां स्पर का निर्माण कराया गया है, वहां कटान करते हुए बांध की तरफ नदी का रुख है। नाव, मोटरबोट से बांस, बल्ली की पायलिंग कराई जा रही है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि बचाव कार्य करा दिया गया है। मैदानी इलाकों में कटान की जानकारी नहीं है। बांध सुरक्षित है, जलस्तर घट रहा है।
घर-खेत सरयू में समाए
विश्नोहरपुर (गोंडा)। साकीपुर गांव में कटान ने सैकड़ों बीघा खेत निगल लिए, लेकिन पीड़ितों का कोई हाल लेने नहीं पहुंचा है। चहलावा में रामचंदर यादव, राममिलन यादव, रामजनक व शुक्लापुरवा माझा में बालकराम, राम मनोरथ, शेषकुमार, राम मनोरथ आदि का आशियाना कटान की चपेट में आ गया है। ये सभी लोग बेघर हो गए हैं। कटान का दंश झेल रहे दत्तनगर बाड़ी माझा के नंदलाल, मुन्ना, बाबू आदि बताते हैं कि पिछले साल भी कटान में खेत व आशियाना गंवा दिया था, लेकिन आज तक कोई सहायता राशि नहीं मिली। लेखपाल ओमप्रकाश वर्मा ने बताया कि पांच लोगों के नाम की सूची तैयार की गई है।