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वर्षों से इंतजार कर रहे 31 हजार लोगों की दर्ज हुई वरासत ृ

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गोंडा। जिले के 1821 राजस्व गांवों में अभियान चलाकर वर्षों से वरासत का इंतजार कर रहे लोगों की मुराद पूरी की गई। पहली फरवरी से शुरू हुए अभियान में जिले ने रेकार्ड बनाया है। एक पखवारे भर में छह सौ से अधिक राजस्व कर्मियों ने 31 हजार से अधिक लोगों के वरासत दर्ज किए गए हैं।
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जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने 20 जनवरी के बाद से अभियान की तैयारियां कराईं और अभियान शुरू कराया। इसके बाद हर राजस्व कर्मी को जिम्मेदारी सौंप कर निगरानी की। इससे मंडल में जिले को पहला स्थान मिला है।
वरासत अभियान को लेकर डीएम मार्कंडेय शाही की सख्ती की लाभ जिले की जनता को बड़े पैमाने पर मिल रहा है। डीएम के प्रयासों से देवीपाटन मंडल के तीन अन्य जनपदों बहराइच, बलरामपुर तथा श्रावस्ती में निर्विवाद वरासत के कुल मामलों के सापेक्ष अकेले गोंडा में डेढ़ गुना निर्विवाद वरासतें दर्ज की गई हैं।
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लोगों को तहसील मुख्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ा और घर बैठे उनकी वरासतें दर्ज हुई हैं। कई लोगों ने डीएम को फोन करके धन्यवाद दिया है और कहा कि बिना किसी सुविधा शुल्क व परेशानी के उनकी लंबे समय से लंबित वरासत की समस्या का निपटारा हो गया। बताया जा रहा है कई मामले तो वर्षों पुराने थे और लोग तहसील का चक्कर काट कर थक चुके थे। अभियान से उनके मन की मुराद पूरी हो गई।
जिलाधिकारी मार्कण्डेय शाही ने बताया कि शासन के निर्देश पर जनपद गोंडा के अविवादित वरासत के लंबित मामलों की जांच कराकर मृतक खातेदारों के विधिक वारिसान का नाम दर्ज कराने के लिए चलाए गए अभियान में 15 फरवरी तक कुल 31 हजार 518 आवेदन पत्र प्राप्त हुए।
जिनके सापेक्ष 30 हजार 816 लोगों की वरासत दर्ज कराई गई। जिसमें तहसील गोंडा में 7027, करनैलगंज में 6412, तरबगंज में 7586 तथा मनकापुर में 9791 वरासतें दर्ज हुईं। जिलाधिकारी ने कहा कि इस कार्यवाही से एक ओर जहां लोगों को भागदौड़ से छुटकारा मिला है। वहीं वरासत के मुकदमों का बोझ भी तहसीलों से कम हुआ है। उन्होंने बताया कि शासन ने जनता की सुविधा को देखते हुए वरासत अभियान की मियाद 28 फरवरी तक बढ़ा दी है।
जिलाधिकारी ने वरासत अभियान के संबंध में जनपद के निवासियों व जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि यदि किसी मृतक खातेदार की वरासत दर्ज न होने का प्रकरण उनकी जानकारी में आता है तो वे इसकी सूचना तत्काल राजस्व विभाग के अधिकारियों को अवश्य दें।
जिससे संबंधित व्यक्ति की वरासत दर्ज कराई जा सके। जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा करें तथा वरासत अभियान की प्रगति से उन्हें रोजाना अवगत कराएं।
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