देर से आए पर दुरुस्त आए। अबकी बार पड़ने वाली ठंड का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा है। दिसंबर में जहां किसानों के सामने ज्यादा ठंड न पड़ने के कारण उनके सामने फसलोत्पादन का संकट खड़ा हो गया था तो वहीं नए साल में जनवरी का आधा महीना बीतने के बाद जब ठंड पड़ी तो उसका असर लोगों के जनजीवन पर दिखाई पड़ने लगा। मंगलवार की सुबह तेज गलन और शीतलहरी के कारण जहां सड़क पर होने वाला यातायात मंद पड़ा नजर आया तो वहीं रिमझिप फुहारों के बीच हुई बारिश ने मौसम को और अधिक ठंडा कर दिया।
पूरे दिन जहां सूर्यदेवता के दर्शन न होने से गलन बनी रही तो वहीं रुक-रुक कर होने वाली बारिश ने किसानों के चेहरे पर चमक ला दी। हालांकि तेज गलन और बारिश के चलते शहर के यातायात से लेकर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी मंगलवार को अन्य दिनों की अपेक्षा पटरी से उतरी रही।
मंगलवार को दिन में भी तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस रहा। सूर्य देवता के दर्शन होने के नाते दिन में भले ही लोगों को ठंड का आभास न होता हो, पर रात में पड़ने वाली ठंड हर किसी पर भारी पड़ रही है।
फिर चाहे वह बेजुबान जानवर ही क्यों न हो। सोमवार की रात रेलवे स्टेशन का नजारा भी कुछ ऐसा ही दिखा। जहां प्लेटफॉर्म की शेड पर ठंड के चलते एक लाइन से तमाम बंदर आपस में चिपककर जैसे-तैसे रात काटते दिखाई दिए।
वहीं, बढ़ी ठंड के मद्देनजर जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने कक्षा एक से कक्षा 8 तक के स्कूलों को 23 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया है और कक्षा नौ से 12 तक के विद्यालयों का टाइम सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक किया गया है।