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ब्लाक में भ्रष्टाचार के खिलाफ रोजगार सेवक हुए मुखर

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गोंडा। ग्राम रोजगार सेवकों ने मनरेगा में कमीशन मांगे जाने का आरोप लगाया है। एकजुट होकर रोजगार सेवकों ने ब्लॉक पर ही धरना दिया। आरोप लगाया कि खंड विकास अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी व सहायक विकास अधिकारी पंचायत पर आरोप लगाए हैं।
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उनका आरोप है कि कमीशन न देने पर मानदेय रोकने की धमकी दी जा रही है। रोजगार सेवकों ने खंड विकास अधिकारी को कार्यालय से बाहर नही निकलने दिया। काफी मान मनौव्वल के बाद धरना स्थगित हुआ।
रोजगार सेवकों ने बताया कि ग्राम पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के पहले बीडीओ तथा एपीओ की मिली भगत से मनरेगा के खाते में खेल किया गया। मजदूर कहीं और के और पैसा किसी और के खाते में भेजने का खेल किया गया। रोजगार सेवकों से दबाव बना कर हस्ताक्षर भी करा लिया गया। हस्ताक्षर न बनाने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी दी गई।
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जिससे कुछ रोजगार सेवकों ने हस्ताक्षर कर दिया था, जिसने नहीं किया उसका फर्जी हस्ताक्षर बना कर भुगतान कर दिया गया। ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति होने के बाद इस खेल का पता तब चला जब रोजगार सेवकों से बीस प्रतिशत कमीशन की मांग की गई। कहा गया कि बिना पैसा दिए मनरेगा का भुगतान नही किया जाएगा।
जिससे कुछ ग्राम पंचायतों में मस्टर रोल निकालने के बाद भी काम शुरू नहीं किया जा सका है। मस्टर रोल जीरो जा रहा है, कुछ ग्राम पंचायतों में प्रधानों के द्वारा रोजगार सेवक का फर्जी हस्ताक्षर बना कर भुगतान किया जा रहा है।
रोजगार सेवकों पर दबाव बनाने के लिए तीन से मानदेय नहीं दिया जा रहा है तथा कारण बताओ नोटिस दिया जा रहा है। एडीओ पंचायत के रुचि न लेने के कारण चौदहवां/ राज्य वित्त का मनरेगा से अभिसरण नहीं किया गया है। जो कि शासनादेश के विरुद्ध है और श्रमिकों का नुकसान भी हो रहा है। रोजगार सेवकों ने जिलाधिकारी को संबोधित पांच सूत्री मांग पत्र भेजा है।
जिसमें बीडीओ, एपीओ को विकास खंड से कार्यमुक्त करना, रोजगार सेवकों का ईपीएफ कटौती का अंश उनके खाते में जमा करना, लेखाकार तथा एडीओ पंचायत के कार्यशैली की जांच करा कर उनका स्थानांतरण करना, रोजगार सेवकों का बकाया मानदेय का भुगतान करना, रोजगार सेवकों को अच्छी क्वालिटी की मोबाइल देना, तथा चौदहवां/राज्य वित्त का मनरेगा से संबंधित अभिसरण संबोधित शासनादेश का शत प्रतिशत पालन कराए जाने की मांग की गई।
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