देवीपाटन का मंडल मुख्यालय होने के बावजूद गोंडा में 10 घंटे की बिजली कटौती आम हो गई है। इससे न सिर्फ मुख्यालय के लोग ही, बल्कि गांवों के लोग भी परेशान हैं। गांवों में लोगों को मुश्किल से छह घंटे बिजली भी नहीं मिल पा रही।
पावर कारपोरेशन ने मंडल मुख्यालयों को 20 से 22 घंटे, जिला मुख्यालयों को 18 से 16 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 14 घंटे और विकासखंड मुख्यालयों को 12 घंटे विद्युत आपूर्ति करने का रोस्टर बनाया है, लेकिन इस समय इसका पालन नहीं हो रहा है।
यह तो मंडल मुख्यालय पर होने वाली बिजली कटौती से ही पता चलता है। सोमवार की रात 9 बजे से 11 बजे के बीच हुई दो घंटे कटौती के बाद जैसे ही लोगों को नींद पड़ी कि सुबह के तीन बजते ही बिजली फिर से गुल हो गई और सुबह 6 बजे आई।
इसके बाद पांच घंटे भी ठीक तरह से बिजली नहीं रही और 10:50 बजे फिर कटौती शुरू हो गई। फिर शाम 4 बजे बिजली आई। मंडल मुख्यालय पर रहने वाले लोग विद्युत आपूर्ति के लिए तय रोस्टर को बेमानी बताते हैं। वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में लोगों को 6 घंटे भी ठीक तरह से बिजली नहीं मिल पा रही।
वहीं पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाकों में होने वाली आपात कटौती के लिए सिस्टम कंट्रोल को जिम्मेदार बता रहे हैं।
अधिशासी अभियंता राधेश्याम चौरसिया का कहना है कि सिस्टम कंट्रोल से जितनी बिजली उन्हें दी जाती है, वही बिजली वह उपभोक्ताओं को मुहैया कराते हैं।
इधर कुछ दिनों से बिजली की मांग बढ़ जाने से आपूर्ति में रोज किसी न किसी कारण से कटौती कर दी जाती है। जिसके लिए एक पत्र सिस्टम कंट्रोल को भेजा गया है।