बुधवार रात से गुरुवार सुबह 10 बजे तक आधा शहर अंधेरे में डूबा रहा। लगातार आठ घंटे बिजली गुल रहने से लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ा। उनकी दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित रही। कड़ी मशक्कत के बाद पावर कॉरपोरेशन को फाल्ट मिला पर ब्रेकडाउन के कारण बंद पड़े तीन बिजलीघरों की बिजली बहाल करने में आठ घंटे लग गए। इस दौरान शहर की एक लाख आबादी को परेशानियां झेलनी पड़ी।
झंझरी उपकेंद्र के अवर अभियंता एतबार अहमद सिद्दीकी के मुताबिक बुधवार रात करीब दो बजे रघुकुल विद्यापीठ के पास लगे बिजली के डबल पोल का इंसुलेटर अचानक पंक्चर हो हो गया। जिस लाइन का इंसुलेटर पंक्चर हुआ, वह लाइन 33 केवी की थी। जिस पर झंझरी के अलावा सिविल लाइन और बड़गांव बिजलीघर भी जुड़े थे। इससे झंझरी सहित बाकी दो बिजलीघरों सिविल लाइन और बड़गांव की बिजली भी गुल हो गई।
रात में बिजलीकर्मियों ने पेट्रोलिंग की लेकिन फाल्ट खोजते-खोजते उन्हें छह घंटे लग गए। सुबह आठ बजे फाल्ट मिला तब खराब इंसुलेटर को बदलकर 33 केवी की लाइन चालू कर दी गई। लेकिन बंद चल रहे तीन बिजलीघरों की बिजली बहाल करने में उन्हें दो घंटे का समय और लग गया। सुबह 10 बजे सभी बंद पड़े बिजलीघरों की बिजली चालू कराई गई। तीन उपकेन्द्रों की बिजली आधी रात से सुबह 10 बजे तक गुल रहने के कारण शहर की एक लाख आबादी को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। जिससे सुबह के समय उन्हें पानी भी नहीं मिल पाया। जबकि बिजली कटने से उनकी दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित रही।