परसपुर थाना क्षेत्र के पूरे लाली उधमगंज गांव में वृद्धावस्था के कारण शरीर से लाचार एवं असहाय 75 वर्षीय बुजुर्ग की जीवन जीने की हिम्मत जवाब दे गई। बुजुर्ग ने चलने-फिरने की लाचारी के कारण रविवार देर रात अपने घर के मड़हे में बड़ेर से तहमद के सहारे फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। ग्राम प्रधान की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
परसपुर थाना क्षेत्र के पूरे लाली उधमगंज गांव निवासी दलित सम्मेदीन (75) ने चलने-फिरने में लाचारी के कारण रविवार देर रात अपने घर के मड़हे में बड़ेर से तहमद के सहारे फांसी लगाकर जान दे दी।
गांव वालों ने बताया कि उसके कोई बेटा नहीं था। पत्नी की भी दो दशक पहले मौत हो गई थी। सम्मेदीन के दो पुत्रियां थीं। एक बेटी गंगादेई की शादी हो चुकी थी, वह अपनी ससुराल में रह रही है। जबकि सम्मेदीन के साथ उसकी मूकबधिर दूसरी बेटी संगमदेई (45) उसके साथ रह रही थी। वह शरीर से वह काफ ी कमजोर एवं असहाय हो गया था। जिससे उसे भोजन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
गांव के लोग बताते हैं कि सम्मेदीन ईमानदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति था। अगर वह भूखा-प्यासा भी रहता था तो किसी से जल्दी बताता नहीं था। अगर किसी ने अपने मन से उसे कुछ दे दिया तो वह खा लेता था। वह अपने घर पर पड़ा रहता था, जिससे वह काफ ी कमजोर हो गया था। ग्रामीणों के मुताबिक वह काफ ी दिनों से बीमार भी रहता था। बेटी के मंदबुद्धि व लाचारी के कारण उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पूरे लाली उधमगंज में सम्मेदीन की मौत के बाद उसकी मूकबधिर मंदबुद्धि बेटी इशारों-इशारों में कुछ बताती थी। जो समझ में नहीं आता था। वहीं गाव के कुछ लोगों ने बताया कि फ ांसी के फं दे पर अपने पिता को लटकता देख उसकी बेटी ने अपने पिता के शव को खुद उतार कर जमीन पर लिटा कर उसे कपड़े से ढक दिया था। सम्मेदीन की मंदबुद्धि बेटी गुमसुम अपने मड़हे के सामने बैठी हर आने जाने वाले को देख रही थी।
पूरेलाली उधमगंज के सम्मेदीन की मौत के मामले में थाना परसपुर की पुलिस की संवेदना नहीं जागी। पूरे लाली गांव के ग्राम प्रधान कृष्णपाल मिश्रा ने बताया कि उन्होंने सुबह ही पुलिस को घटना की सूचना दे दी थी, मगर पुलिस दो घंटे देरी से पहुंची।