गोंडा। यूपी एग्रीज परियोजना के तहत विकासखंड तरबगंज के ग्राम परासपट्टी मझवार में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक से धान की सीधी बोआई का शुभारंभ किया गया। किसान राधेश्याम सिंह के एक हेक्टेयर खेत में इस आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन किया गया।
कृषि विभाग के अनुसार डीएसआर धान की खेती की ऐसी वैज्ञानिक विधि है, जिसमें नर्सरी तैयार करने और रोपाई की आवश्यकता नहीं होती। इससे पानी, श्रम और लागत में बचत होती है। परियोजना के तहत जिले में 7114 हेक्टेयर क्षेत्रफल में डीएसआर विधि से खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 150 गांवों के 3000 किसानों का चयन किया गया है।
सहायक विकास अधिकारी (कृषि) धनंजय कुमार ने बताया कि चयनित किसानों को धान का बीज, उर्वरक और कृषि रक्षा रसायन मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही वैज्ञानिकों की निगरानी में खेती कराकर आधुनिक तकनीक का प्रसार किया जाएगा। कृषि वैज्ञानिक सुब्रजीत व हरिश्याम सिंह की निगरानी में बोआई की शुरुआत की गई है।
डीएसआर तकनीक के प्रमुख फायदे
-30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत।
-नर्सरी एवं रोपाई की आवश्यकता नहीं।
-श्रम लागत में ज्यादा कमी।
-कम समय में बोआई पूरी।
-15 से 20 प्रतिशत तक अधिक पैदावार की संभावना।
-जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा।