अषाढ़ महीने में चिलचिलाती धूप ने अन्नदाताओं को तबाह कर दिया है। खेतों में रोपी गई धान की फसल सूखकर पुआल हो गई है। कुदरत के कहर के बाद भी किसान अपनी गाढ़ी कमाई का डीजल फूंककर फसल बचाने की जद्दोजहद में जुट गये हैं। किसानों ने सरकार से डीजल व उर्वरकों में विशेष छूट देने की मांग की है।
विदित हो कि विगत एक सप्ताह से हो रही तेज धूप के कारण खेतों में रोपी गई धान की फसल सूखकर पुआल हो गई है। कुछ किसान अपनी गाढ़ी कमाई का डीजल पंपिग सेट में जलाकर धान की फसल बचाने में जुटे है। किसानों ने अभी भी बारिश की उम्मीद नहीं छोड़ी है।
असिंचित इलाकों में और बुरा हाल है। किसान कातर निगाहों से धान की फसल को सूखते हुए देखकर कुदरत को कोस रहे हैं। प्राकृतिक जलाशयों से निकली नहरें पानी की कमी के चलते सूखी हैं। राजकीय नलकूप बिजली की कमी के चलते ठप हैं ऐसे में किसान फसल बचाने के लिए छटपटा रहा है।
किसान रज्जाक, छेदी, राम कुबेर, सगीर व दीप नरायन आदि ने बताया कि सूखे के चलते धान की फलस 80 प्रतिशत तबाह हो चुकी है। तेज धूप व लगातार कम हो रही नमी के चलते दलहनी व तिलहनी फसलों का उत्पादन भी प्रभावित होगा। रज्जाक ने बताया कि पंपिंग सेट चलाकर धान की फसल बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
जिले में अवर्षण की स्थिति की निगरानी शुरू कर दी गई है। सभी संबंधित विभागों को स्थिति का आंकलन करने का निर्देश दिया गया है। सूखे की हालत की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। -गंगाराम गुप्ता, एडीएम-आपदा अधिकारी बलरामपुर