बेलसर। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के स्नातक एवं परास्नातक पाठ्यक्रम में डॉ. श्रीनरायन तिवारी की पुस्तकें शामिल की गई हैं। परसपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत खरगूपुर पूरे शंभू निवासी श्रीनरायन तिवारी बेलसर के जनता इंटर काॅलेज अमदही से 2013 में प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होने के बाद साहित्य सृजन में लग गए।
उन्होंने बताया कि साहित्य सृजन की प्रेरणा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. महराजदीन पांडेय से मिली। हिंदी विषय में गोंडा जनपद का इतिहास एवं उसकी विद्वत्परंपरा और संस्कृत विषय में संस्कृत वाङ्मय का इतिहास को मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। श्रीनरायन तिवारी ने गोंडा जनपद एवं तुलसीदास, गोनर्दीय पतंजलि, अवधी लोकगीत, अवधी भाषा एवं साहित्य का इतिहास, शोध मंजरी, संस्कृत वाङ्मय का इतिहास (प्रथम खंड), संस्कृत वाङ्मय का इतिहास द्वितीय खंड (अप्रकाशित), अवध का लोक नाट्य, नौटंकी के नवरंग (अप्रकाशित) पुस्तकों का संपादन व लेखन किया है। (संवाद)