गोंडा। वर्ष 2017 में जिले में तैनाती के बाद कार्यभार ग्रहण न करने के कारण डॉ. गुलरेज स्वास्थ्य विभाग के लिए पहेली बने हुए हैं। दरअसल, उसी वक्त कार्यभार न संभालने के बारे में जानकारी भेजने के बाद विभाग खामोश हो गया। वह इतने दिनों से कहां हैं, क्या कर रहे हैं... इन सवालों का जवाब विभाग के पास नहीं है।
जिले में कुल 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इसके लिए जिले में करीब 108 चिकित्सकों की तैनाती है। ताजा मामला अंबेडकरनगर से सामने आने के बाद विभाग के अधिकारियोें के लिए भी डॉ. गुलरेज कौतूहल का विषय बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अगर जिले में वह कार्यभार ग्रहण करते तो यहां पर उनका रिकॉर्ड होता। इसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाती।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी का कहना है कि हमने समाचार पत्र में डॉ. गुलरेज के बारे में पढ़ा है, लेकिन इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। यही जवाब प्रभारी सीएमओ डॉ. आदित्य वर्मा का भी है। कहते हैं कि थोड़ा समय दीजिए, हम पता करके बताएंगे।
देवीपाटन मंडल की अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अल्पना रानी गुप्ता ने बताया कि अनुपस्थित चिकित्सकों के बाबत जानकारी की जाएगी। मंडल के चारों जिलों के सीएमओ से अलग-अलग ग्रेड वार जानकारी जुटाकर कार्रवाई की जाएगी।
सवालों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति
जिले में तैनाती स्थल से चिकित्सकों की अनुपस्थिति एक बड़ा सवाल है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले में तीन चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित हैं। इसकी जानकारी महानिदेशालय को भेजी जा चुकी है। वैसे यह कोई नया मामला नहीं है, इससे पहले पूर्व सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा के कार्यकाल में भी 11 चिकित्सक जांच में फंसे थे।