मेडिकल कॉलेज में बुजुर्ग को वैक्सीन लगाते स्वास्थ्य कर्मी। - संवाद
- फोटो : शहर के पर्यावरण पार्क में खेलते बच्चे।
गोंडा। ठंड के मौसम में जहां लोग ठिठुरन व गलन से परेशान हैं। वहीं, दूसरी ओर कुत्तों का आतंक भी बढ़ गया है। सोमवार को जिला अस्पताल में एक ही दिन में कुत्तों के हमलों से घायल 88 और मंगलवार को 50 नए मरीजों को एआरवी लगाई गई।
जिले में कुत्तों का खौफ दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। आलम ये है कि छोटे बच्चों का मोहल्लों और गलियों में खेलना दूभर हो गया है। फार्मासिस्ट अजय तिवारी ने बताया कि बीते दो दिन में कुत्तों के काटने से जख्मी हुए 168 लोग मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इनमें महिलाओं व बच्चों की संख्या ज्यादा है। सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि गर्मी के मौसम में कुत्ते आमतौर पर अधिक हिंसक माने जाते हैं, वहीं ठंड बढ़ने के बाद भी उनका खतरा कम नहीं हुआ है। यह संभव है कि ठंड से बचने के लिए कुत्ते भोजन या आश्रय की तलाश में अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में वे हिंसक हो जाते हैं।
सीएमएस ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को रेबीज संक्रमित किसी जानवर ने काट लिया हो तो उसे 24 घंटे के भीतर वैक्सीन की डोज अवश्य ले लेनी चाहिए। कुत्ता काटने वाले स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डिटॉल से अच्छे से धोकर साफ जरूर कर लें। उसके तुरंत बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए। ठंड बढ़ने के कारण कुत्ते हिंसक व आक्रामक हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- कुत्तों के व्यवहार को समझें, उन्हें उकसाएं नहीं।
- कुत्ता पीछे पड़ें तो दौड़ें नहीं, सुरक्षित स्थान पर रुकें।
- छोटे बच्चों को गलियों व पार्कों में अकेला न छोड़ें।
- कुत्ते द्वारा काटने पर साबुन से घाव को धोएं।
- अस्पताल जाकर तत्काल वैक्सीन लगवाएं।