बच्चे को सामान देते डीएम व उनकी पत्नी
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मुफलिसी से मजबूर होकर करनैलगंज की एक रेडीमेड कपड़े की दुकान पर सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से काम करने वाले शादाब खान की जिन्दगी में डीएम आशुतोष निरंजन की मुहिम नया सबेरा बनकर आयी। डीएम आशुतोष निरंजन ने 14 वर्षीय बाल श्रमिक शादाब खान को गोद लेकर उसकी शिक्षा-दीक्षा का जिम्मा उठाया है। मंगलवार को उन्होंने उसको घर पर बुलाकर उसके साथ खाना खाया।
बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों का भविष्य संवारने के लिए डीएम ने स्वयं शादाब खान पुत्र नसीम अख्तर निवासी मोहल्ला गाड़ी बाजार पूर्वी कस्बा करनैगलंज को गोद लेकर तत्काल प्रभाव से प्रारम्भिक शिक्षा.दीक्षा का प्रबंध कर दिया है।
डीएम ने बताया कि अन्य बच्चों को सोमवार को ही अधिकारियों की सुपुर्दगी में बच्चों को दे दिया गया है, लेकिन एक बच्चे को उन्होंने स्वयं गोद लिया है जिसकी पूरी जिम्मेदारी वह उठाएंगे। वह जिले में रहें या कहीं अन्य। उन्होंने बताया कि छापेमारी अभियान के दौरान शादाब दुकान पर काम करता हुआ पाया गया था।
मंगलवार को डीएम निरंजन ने शादाब को अपने आवास पर बुलाकर अपने साथ खाना खिलाया और उसकी शिक्षा के लिए तत्काल ट्यूशन की व्यवस्था के साथ ही ट्यूशन जाने के लिए एक साइकिल, कपड़े और किताबों का प्रबन्ध कराया है। इस दौरान उनकी पत्नी डॉ. नेहा सिंह भी मौजूद थी। डीएम ने बताया कि अगले शिक्षा सत्र में शादाब का एडमीशन वे किसी अच्छे स्कूल में कराएंगे। गोद लिए हुए बच्चों का ई.डॉटाम तैयार कर ऑनलाइन मानीटरिंग की व्यवस्था बनाई जाएगी।