गोंडा। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान जान जोखिम में डालकर काम करने वाले 150 संविदा कर्मियों को अब सेवा समाप्ति का नोटिस थमा दिया गया है। सेवा समाप्ति की खबर सुनते ही कर्मचारियों का गुस्सा भड़क उठा। नाराज कर्मचारियों ने जिला अस्पताल स्थित कोविड बिल्डिंग के सामने एकत्रित हो कर हंगामा शुरू कर घंटों धरना प्रदर्शन किया। इससे पूरे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मची रही। नाराज कर्मियों ने इस दौरान अस्पताल के प्रबंधक व अन्य डॉक्टरों को भी गेट से अंदर नहीं जाने दिया। इधर, शाम को मिली जानकारी के मुताबिक, संविदा कर्मियों का एक माह कार्यकाल बढ़ा दिया गया है।
कोरोना संक्रमण की पहली लहर के दौरान कोविड अस्पताल समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर करीब 150 कर्मियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के जरिए हुई थी। इसमें से 62 कर्मचारी कोविड अस्पताल में और अन्य लोग सीएचसी, पीएचसी व टीकाकरण केंद्र पर करीब दो साल से तैनात थे। कोविड काल के दौरान इन कर्मियों ने अपनी जान की चिंता न करते हुए संक्रमित मरीजों की जांच से लेकर पीड़ितों के इलाज और कोविड टीकाकरण से जुड़े कार्यों को पूरी मेहनत के साथ किया था। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोविड काल के दौरान हुई इन भर्तियों का कार्यकाल 31 मार्च से आगे न बढ़ाने का का निर्णय लिया है। इसके चलते ही जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र रावत ने भी गुरुवार को कोविड अस्पताल से जुड़े सभी संविदा कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का नोटिस थमा दिया।
कोविड बिल्डिंग में डॉक्टरों को घुसने से रोका
संविदा समाप्ति की नोटिस पाने वाले करीब 150 कर्मियों में से 62 कर्मी कोविड अस्पताल में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। इसमें स्टाफ नर्स पर 20, वेंटीलेटर टेक्नीशियन के पद पर 6 , ओटी टेक्नीशियन पर 3, वार्ड ब्वाय पर 14, लैब टेक्नीशियन के पद पर एक और कंप्यूटर आपरेटर के बतौर दो लोग कार्यरत हैं। सीएमएस की तरफ से अचानक मिली संविदा समाप्ति की नोटिस पाने के बाद इन कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। कर्मचारियों ने कोविड अस्पताल के सामने जमकर हंगामा करते हुए कोविड बिल्डिंग में किसी भी डॉक्टर व कर्मचारी को प्रवेश नहीं करने दिया। हंगामा बढ़ता देख एसीएमओ व एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित कर्मचारियों को किसी तरह समझा बुझाकर माहौल शांत कराया।
मरीजों का इलाज होगा प्रभावित
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हटने से मरीजों का इलाज प्रभावित होगा क्योंकि ज्यादातर कर्मचारी वार्ड में तैनात हैं। इसमें प्रमुख तौर पर ओटी, वेंटिलेटर टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय, वार्ड आया इत्यादि कर्मचारी हैं। इनके जाने से मरीजों को मिल रही इलाज की सुविधा सीधे प्रभावित होगी और उन्हें इलाज के लिए भटकना पड़ सकता है। इसके साथ ही टीकाकरण में लगी नर्सों के हटाने से टीकाकरण कार्य भी सीधे तौर पर प्रभावित होगा।
खाली पदों पर समायोजन की मांग
संविदा कर्मचारियों का कहना है कि कोविड के दौरान उन लोगों ने अपनी जान जोखिम में डाल कर पूरी मेहनत से काम काज कर मरीजों की जान बचाई है। इसके बावजूद उन्हें नौकरी से हटाया जा रहा है, जबकि जिला अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इन कर्मचारियों ने रिक्त पदों पर उनका समायोजन किए जाने की मांग की है।
कोरोना संक्रमण के दौरान नियुक्त हुए कर्मियों की सेवा तिथि 31 मार्च तक ही निर्धारित थी। इसके बाद सेवा विस्तार का कोई शासनादेश नहीं मिला है। इस लिए इन्हें हटाने का नोटिस जारी किया गया है। इन कर्मचारियों ने कोरोना संकट काल में बहुत मेहनत से अपना कार्य किया था। इस लिए इनके सेवा विस्तार के लिए शासन से अनुरोध किया जाएगा।
डॉ. जय गोविंद, एसीएमओ