गोंडा। देवीपाटन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के बर्खास्त कर्मचारी को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अपीलीय अथाॅरिटी बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को चार माह में अपील की पुनः सुनवाई कर निर्णय करने का आदेश दिया है।
बड़गांव के खैरा नई बस्ती काॅलोनी निवासी सुशील कुमार पांडेय की नियुक्ति तत्कालीन देवीपाटन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (अब उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक) में लिपिक पद पर थी। बैंक की खरगूपुर शाखा में तैनाती के दौरान उन पर कुछ गंभीर आरोप लगे। जांच में कथित तौर पर दोषी पाए जाने पर बैंक प्रबंधन ने उन्हें सेवामुक्त कर दिया।
सुशील ने बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के समक्ष विभागीय अपील प्रस्तुत की, लेकिन बिना कोई कारण दर्शाए 14 जुलाई 2004 को अपील खारिज कर दी गई। 19 जुलाई 2004 को बैंक के अध्यक्ष ने इसकी सूचना अपीलकर्ता को दी। इस आदेश के खिलाफ सुशील ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 21 अगस्त 2014 को याचिका निरस्त कर दी तो उन्होंने हाईकोर्ट में विशेष अपील प्रस्तुत की। मामले की सुनवाई के दौरान सुशील के अधिवक्ता ने कहा कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने बिना विवेक का प्रयोग किए ही विधि विरुद्ध निर्णय दिया है।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्क, मामले के तथ्य और परिस्थितियों पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति राजीव भारती व न्यायमूर्ति राजन राय ने 19 जुलाई 2004 को बैंक के अध्यक्ष व 21 अगस्त 2014 को हाईकोर्ट के एकल पीठ द्वारा पारित आदेश निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि विभागीय अपील में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का निर्णय कानून की नजर में कोई फैसला नहीं है। कोर्ट ने बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को अपीलकर्ता सुशील कुमार पांडेय की अपील को पुनर्जीवित करने और एकल पीठ के अवलोकन से बिना प्रभावित हुए सभी पहलुओं व तथ्यों पर विचार करते हुए चार माह में विधि सम्मत निर्णय करने का आदेश दिया है।