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डॉक्टर का फर्जी हस्ताक्षर से जारी कर देते दिव्यांग प्रमाणपत्र

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गोंडा। स्वास्थ्य विभाग अपने कारनामों से आये दिन सुर्खियों में बना रहता है। कभी खून का काला कारोबार तो कभी दिव्यांगों के प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाये जाने के नाम पर चल रहे खेल की एक और तस्वीर सामने आई।
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जिला अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र के आवेदन फार्म पर डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर प्रमाण जारी करने का खेल हो रहा है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डा समीर गुप्ता अपना हस्ताक्षर व रिपोर्ट लगा देख खुद दंग रह गए।
फिजीशियन डॉ समीर गुप्ता ने बताया कि दिव्यांग प्रमाणपत्र के आवेदन फार्म पर उनका हस्ताक्षर बनाकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। जिसकी जानकारी उन्हें खुद नहीं है। जिला अस्पताल में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा हो रहा है। अधिकांश प्रमाणपत्र दलालों के माध्यम से ही बनाये जाते हैं। दलाल पैसे की वसूली कर डॉक्टर से लेकर पटल देखने वाले बाबुओं तक उनका हिस्सा पहुंचा देते हैं।
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दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदन के प्रिंटआउट पर अभ्यर्थी का फोटो व नाम किसी डॉक्टर से सत्यापित कराना पड़ता है।
लेकिन फर्जीवाड़ा में महारथ हासिल कर चुके लिपिक खुद ही डॉक्टर का हस्ताक्षर बनाकर खानापूर्ति कर देते हैं। जयप्रभा ग्राम के कुंज बिहारी मिश्र व गिलौली के मेई पाठक निवासी पटेश्वरी प्रसाद के आवेदन पत्र पर फिजिशियन डॉ. समीर गुप्ता के फर्जी हस्ताक्षर बनाये गए।
दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर होने वाला अवैध वसूली व फर्जीवाड़ा कोई नया नहीं है। दिव्यांग पटल देखने वाले बाबू मोटी कमाई के चलते ये पटल छोड़ना ही नहीं चाहते हैं। इसी के चलते विगत 16 फरवरी को दिव्यांग पटल देखकर लिपिक के ऊपर जिलाधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था।
सीएमओ कार्यालय में वरिष्ठ सहायक दिव्यांग पटल का कार्य देख रहे नरेंद्र कुमार मिश्र हटाये जाने पर भी पटल छोड़ने को तैयार नहीं थे। जिस पर जिलाधिकारी ने कार्यवाई करने हुए नरेंद्र मिश्र पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
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