पसका सूकरखेत के त्रिमुहानी घाट पर रविवार को पौष पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने भीषण ठंड के बावजूद सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। सुबह ठंड की वजह से लोगों की भीड़ कुछ कम रही, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे पूरा पसका बाजार मेलार्थियों से पट गया। सरयू में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान वाराह के मंदिर में जाकर माथा टेका। हालांकि इस बीच श्रद्धालुओं को काफी अव्यवस्थाओं से भी जूझना पड़ा।
रविवार को सुबह सबसे पहले कल्पवास कर रहे साधु-संत तथा नागा साधुओं ने सरयू नदी में डुबकी लगाई। इसके बाद अन्य श्रद्धालुओं ने स्नान करना शुरू किया जो दोपहर बाद तक जारी रहा।
स्नान ध्यान के बाद भक्तों ने त्रिमुहानी घाट पर ही पंडों सहित अन्य लोगों को दानकर पुण्य लाभ अर्जित किया। वहीं, घाटों पर दूरदराज इलाकों से आए श्रद्धालुओं ने सत्यनारायण व्रत कथा सुन भंडारा भी किया। मेला परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।
मेले में पसका विकास मंच की ओर से आयोजित धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगों को बांधे रखा। सनातन धर्म परिषद एवं तुलसी जन्म भूमि विकास समिति की ओर से भी कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
मेले में मौत के कुएं से लेकर, आदर्श नृत्यकला, जादूगर एस सरकार, इलेक्ट्रिक झूला, ड्रेगन रेल, शिव शक्ति ब्रेक झूला डांस, फोटो स्टूडियो से लेकर अनेक तरह की दुकानें आकर्षण का केंद्र रहीं।
पसका नंदौर के पास सड़क संकरी होने के कारण पसका की ओर से आने वाले वाहनों को बीच में ही रुकवा दिया गया। इससे लोग घंटों जाम में फंसे। जबकि बीच-बीच में कई अन्य वीआईपी के आने से जाम की नौबत बनी रही।
महाकवि तुलसीदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय परसपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की तरफ से प्रभारी प्राचार्य डॉ. आरबी सिंह तथा कार्यक्रमधिकारी डॉ. ओपी सिंह तथा अरुण प्रताप सिंह ने वाराह मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं के लिए टेंट लगाकर स्वागत कक्ष बनाया था।
कई जगह पर लोगों ने भंडारे का भी आयोजन किया। जो सुबह 6 बजे से चालू हो गया और दोपहर बाद तक चलता रहा। पसका घाट से लेकर भगवान वाराह के मंदिर तक करीब एक दर्जन स्थानों पर लोगों ने भंडारे का स्टाल लगा था।