सावन माह के अंतिम दिन शनिवार को जलाभिषेक के लिए शिवमंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भगवान शिव से सुख-समृद्घि का आशीर्वाद मांगा। भंडारे में भक्तों ने प्रसाद भी ग्रहण किया।
पचपेड़वा ब्लॉक के कुशमहर गांव में करीब दो सौ वर्ष पूर्व शिवमंदिर का निर्माण कराया गया था। मंदिर स्थापित कराने वाले पाटनदीन का परिवार नेपाल देश के बनचौरा गांव में रहता है। हर साल सावन माह में पूरा परिवार मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आता है।
क्षेत्र में भी शिवमंदिर की काफी मान्यता है। सावन के अंतिम दिन जलाभिषेक के बाद भंडारे का आयोजन किया जाता है। सावन के अंतिम दिन शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने बेलपत्री, धतूर, भांग, समी की पत्ती, शहद, गन्ना, अबीर, दूध-दही, घी, पुष्प आदि चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की।
पवित्र नदियों व सरोवरों से जल भरकर भक्तों ने जलाभिषेक किया। बोलबम के जयकारे से शिवमंदिर दिनभर गूंजते रहे। शिवभक्तों ने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
झारखंडी, भगवतीगंज स्थित झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, राजापुर भरिया जंगल स्थित कल्पेश्वरनाथ महादेव मंदिर, पचपेड़वा स्थित शिवगढ़धाम मंदिर, तुलसीपुर के देवीपाटन स्थित शिवमंदिर, मथुरा बाजार स्थित गौरी-शंकर शिवमंदिर, ललिया स्थित मोहनदास बाबा शिवमंदिर, बहादुरगंज स्थित शिवमंदिर, उतरौला नगर स्थित दुखहरन नाथ शिवमंदिर सहित अन्य मंदिरों में भक्तों ने सुख-शांति के लिए भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की।