गोंडा में इसी तरह बनेगा मलबा निस्तारण प्लांट।
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गोंडा। नगर पालिका परिषद गोंडा तराई क्षेत्र में आने के कारण सीवरेज प्लांट नहीं बन सकता। इसलिए शासन ने शहरी क्षेत्र में निकलने वाले मलबे के ट्रीटमेंट के लिए अलग से फीसल (मलबा निस्तारण प्लांट) लगाया जाएगा। प्लांट का निर्माण गोमतीनगर प्रदूषण नियंत्रण यूनिट द्वारा किया जाएगा। इस पर करीब साढ़े चार करोड़ का खर्च आएगा। इसकी निविदा भी करायी जा चुकी है। इतना ही नहीं इस प्लांट से मलबे से खाद का निर्माण किया जाएगा जिसे किसानों के हाथ बेची जाएगी। इससे शहर में गंदगी निस्तारण का हब तैयार होगा और स्वच्छता को रफ्तार मिलेगी।
गोंडा शहर में मलबा निस्तारण के लिए व्यवस्था नहीं है। शौचालयों के टैंकों से निकलने वाला मलबा इधर उधर नालों में फेंक दिया जाता है। जिससे गंदगी के साथ प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे वायू प्रदूषण के साथ जल प्रदूषण बढ़ रहा है। पेयजल में विभिन्न रासायनिक तत्व मिल गए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए (एफएसटीपी) फीसल स्लग ट्रीटमेंट प्लांट यानि मलबा उपचार प्लांट बनाया जाएगा। शासन ने इसके लिए अपनी स्वीकृति दे दी है। यह प्लांट अमृत योजना में शामिल टाउन एरिया या नगर पालिका परिषदों में बनाया जाएगा जहां पर सीवरेज व्यवस्था नहीं है।
जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि गोंडा तराई क्षेत्र में आता है इसलिए यहां पर सीवरेज की सुविधा नहीं हो सकती है। इसलिए घरों, सार्वजनिक सुलभ शौचालयों व अन्य स्थानों से निकले वाले मलबों को सड़क पर बहने से रोकने के लिए यह प्लांट लगाया जाएगा। इस प्लांट पर करीब 4.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस प्लांट पर मलबे से पानी को शुद्ध कर अलग कर दिया जाएगा और मलबे को खाद में परिवर्तित कर दिया जाएगा। यह खाद बहुत ही उपजाऊ होगी जिसे किसान खरीद कर अपने खेतों में प्रयोग कर सकेंगे। इससे फसल उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा और लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। इस प्लांट को चलाने के लिए सोलर पैनल सिस्टम लगाया जाएगा। इससे ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा मिलेगा।
सीवर सक्शन मशीन से टैंकर में भरा जाएगा मलबा
प्लांट तक मलबे को पहुंचाने के लिए निकाय प्रशासन सक्शन पाइप के जरिए टैंकों से मलबा टैंकरों भरेगा। इसके बाद कहीं अन्यत्र न गिराकर सीधे प्लांट पर पहुंचाएगा। प्लांट पर पहुुंचने के बाद उसका ट्रीटमेंट होगा। इसके लिए नपाप प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन व कर्मी होंगे। वे यह कार्य प्रतिदिन करेंगे। इस प्लांट में प्रति दिन 32 किलोलीटर मलबे का निस्तारण होगा। इससे शहरी क्षेत्र गंदगी व प्रदूषण से मुक्त हो जाएगा।
जल निगम की गोमती प्रदूषण नियंत्रण यूनिट लखनऊ की देखरेख में प्लांट का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए निविदा भी आमंत्रित की जा चुकी है। निविदा के खुलने के बाद फर्म तय हो जाएगी और निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इसके लिए भूमि का चयन भी पूरा हो चुका है। शीघ्र ही इस प्लांट के स्थापित होने से मलबा निस्तारण की समस्या दूर होगी। -पीयूष यादव, विशेषज्ञ, अभियंता शहरी संरचना अमृत योजना