एक कलयुगी बेटे ने जमीन के लिए अपनी मां को लेखपाल से मिलकर अभिलेखंों में मृत दिखा दिया। इसके बाद जमीन की वरासत अपने नाम करा ली। कुछ दिन बाद बेेटे ने 10 बीघे जमीन को बेच दिया। जानकारी होने पर महिला ने इसकी शिकायत पर एसडीएम से की।
उन्होंने मामले की जांच तहसीलदार से कराई तो लेखपाल का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। एसडीएम ने लेखपाल को सस्पेंड कर दिया है तथा मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। एसडीएम ने फर्जी ढंग से कराई गई वरासत भी निरस्त कर दिया है।
मामला तुलसीपुर तहसील के विजयीडीह गांव का है। स्थानीय निवासी बेवा वेदवती उर्फ बिट्टा ने बताया कि पति की मौत के बाद वर्ष 2004 में जमीन की वरासत उनके नाम हो गई थी।
उनके बेटे सुशील कुमार ने तत्कालीन लेखपाल विनोद मौर्य से मिलकर मां को अभिलेखों में मृत दिखा दिया। इसके बाद 10 बीघे जमीन की वरासत अपने नाम करा ली। बाद में सुशील ने वरासत में मिली 10 बीघे जमीन दूसरे के नाम बैनामा कर दी। दिसम्बर 2016 में जमीन पर दूसरे का कब्जा होता देख वेदवती ने विरोध किया तो उसे पता चला कि जमीन उसके बेटे ने बेच दिया है।
बेटे की कारगुजारी देख मां के होश उड़ गये। अपनी जमीन वापस पाने के लिए वेदवती ने मामले की शिकायत एसडीएम तुलसीपुर से की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम एसके त्रिपाठी ने मामले की जांच तहसीलदार पुष्कर मिश्रा को सौंपी।
तहसीलदार की जांच के दौरान पीड़िता के बेटे व लेखपाल का फर्जीवाड़ा सामने आया। दो दिन पहले तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी। जिसके बाद एसडीएम एसके त्रिपाठी ने तत्काल प्रभाव से लेखपाल विनोद मौर्य को सस्पेंड कर दिया है। वर्तमान समय में विनोद मौर्य इसी तहसील के बखरकोटवा गांव में तैनात हैं।
इसके साथ ही एसडीएम ने फर्जी वरासत को भी निरस्त कर दिया है। एसडीएम ने बताया कि मामले में पीड़िता के बेटे सुशील कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराने का आदेश भी दिया गया है।