पत्नी व अबोध बालक को जलाकर मारने के आरोप में पति व उसकी प्रेमिका को एफटीसी प्रथम न्यायाधीश ने आजीवन कारावास व 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साक्ष्यों के अभाव में न्यायाधीश ने मृतका की सास व ससुर को दोषमुक्त कर दिया है।
ग्राम मझौवा विस्कोहर जिला सिद्धार्थनगर निवासी प्रेम कुमार शुक्ला ने 10 दिसंबर 2011 को थाना गौरा चौराहा जनपद बलरामपुर में प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी बहन नंदनी व पांच वर्षीय भांजे सुंदरम को बहनोई राजेश कुमार मिश्र व उसकी प्रेमिका कामिनी वर्मा ने कपड़े की दुकान में जलाकर मार दिया।
वादी मुकदमा का आरोप था कि नंदनी की सास पार्वती देवी व ससुर जगदंबा प्रसाद मिश्र भी इस घटना में शामिल थे। पुलिस ने हत्या, साक्ष्य छिपाने व दहेज उत्पीड़न के आरोप में राजेश कुमार मिश्र, पार्वती देवी, जगदंबा प्रसाद व कामिनी वर्मा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया।
विवेचना के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता उमाशंकर सिंह ने नौ गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता रवींद्र यादव ने न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि राजेश व कामिनी के बीच अवैध संबंध थे।
इसका राजेश की पत्नी नंदनी विरोध करती थी। अवैध संबंधों के रास्ते में बाधा होने के कारण राजेश व कामिनी ने नंदनी व सुंदरम को गौरा चौराहा स्थित गारमेंट की दुकान में जलाकर मार डाला। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपियों को बेकसूर बताया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम सुनील कुमार ने राजेश व कामिनी को हत्या व साक्ष्यों को छिपाने का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने राजेश व कामिनी को दहेज उत्पीड़न के आरोप से बरी कर दिया है। साक्ष्यों के अभाव में न्यायाधीश ने पार्वती देवी व जगदंबा प्रसाद मिश्र को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है।