बलरामपुर। तमाम कोशिशों के बावजूद सरकारी अस्पतालों के स्वास्थ्य कर्मचारियों की संवेदनहीनता घटने के बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही है। पैसे न मिलने के कारण जिला महिला अस्पताल के बरामदे में करीब 12 घंटे तड़पती रही प्रसूता ने आखिरकार बाथरूम में बच्चे को जन्म दिया।
इसी तरह पैसे न मिलने पर दूसरी प्रसूता को 6 घंटे इंतजार के बाद गंभीर बताकर बाहर रेफर कर दिया गया। घटना को लेकर जहां लोगों में आक्रोश व्याप्त है, वहीं स्वास्थ्य राज्यमंत्री तथा डीएम ने भी नाराजगी जताई है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. एसपी यादव ने कहा कि प्रकरण गंभीर है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जबकि अस्पताल की सीएमएस ने आरोपों को निराधार व बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा िक इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।
नगर के मोहल्ला पहलवारा निवासी सीमा को बुधवार दिन में 11 बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिवारीजन जिला महिला चिकित्सालय ले गए। सीमा के ससुर बेऊर ने बताया कि उनकी बहू के इलाज के लिए साढ़े चार हजार रुपये मांगे गए।
खून की कमी व जांच के नाम पर परेशान किया गया। 12 घंटे तक सीमा अस्पताल के बरामदे में दर्द से तड़पती रही। यही नहीं सीमा को लगाई गई ड्रिप भी परिवारीजन बरामदे में पकड़े बैठे रहे। रात 11 बजे सीमा ने बाथरूम में बच्चे को जन्म दिया। मीडिया कर्मियों के पहुंचने पर आनन-फानन में स्वास्थ्य कर्मियों ने प्राथमिक उपचार कर जच्चा-बच्चा को घर भेज दिया।
इसी तरह तिलकनगर जुआथान निवासी राजू चौहान ने बताया कि वह बुधवार शाम 6 बजे अपनी पत्नी रीता को प्रसव कराने के लिए जिला महिला अस्पताल ले गए। अस्पताल में इलाज के लिए पैसों की मांग की गई। पैसे न देने पर देर रात क्रिटिकल केस बताकर उसे जिले से बाहर के लिए रेफर कर दिया गया। इस संबंध में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. एसपी यादव ने कहा कि प्रकरण गंभीर है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सीएमएस जिला महिला अस्पताल बलरामपुर डॉ. नीना वर्मा ने कहा कि प्रसूता सीमा तथा रीता के परिवारीजनों द्वारा अस्पताल कर्मियों पर लगाए गए पैसे मांगने का आरोप झूठा है। सीमा की डिलीवरी लेबर रूम में कराकर उसे घर भेजा गया है। रीता का बच्चा पेट में उल्टा था तथा वह एनीमिक थी। परिवारीजनों को आवश्यक सुझाव दिया गया। किसी भी प्रसूता के साथ अस्पताल में किसी तरह की संवेदनहीनता नहीं बरती गई।