चरमराने लगा चरसड़ी बांध, प्रशासन ने चरपुरवा गांव खाली कराया
गोंडा। पानी के तेज बहाव से एल्गिन चरसड़ी बांध चरमराने लगा है। अस्थाई रूप से बनाए गए रिंग बांध से पानी टकराने के कारण वहां भी तेजी से कटान शुरू हो गई है। बासगांव के पास बांध में रिसाव शुरू हो गया है और नकहरा के पास बांध में कटान होने लगी है।
इस कारण प्रशासन ने चरपुरवा गांव खाली करा लिया है। मौके पर लगे कर्मी बांध को बचाने के लिए पेड़ों की टहनियां, बालू व मिट्टी भरी बोरियां डाल रहे हैं। बांध को बचाने की जद्दोजहद भी तेज कर दी गई है। इससे ग्रामीणों में दहशत बढ़ती जा रही है।
घाघरा का जलस्तर शनिवार शाम को खतरे के निशान से करीब 36 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई थी। जो रविवार को सुबह से घटने लगी और शाम तक खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर तक बह रही थी। घटती घाघरा ने तेजी से कटान करना शुरू कर दिया।
घाघरा का विकराल रूप देख ग्रामीणों के हाथ पांव फूल गए। बांध पर मौजूद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में बांध में कटान रोकने की जद्दोजहद शुरू कर दी। हरे पेड़ काट कर डाले गए। सीमेंटेड बोल्डर और बालू भरी बोरियां डालकर बांध को बचाने की कवायद तेजी से चल रही है।
मगर कटान को देखते हुए रिंग बांध की उल्टी गिनती शुरू है। अगर यही हालात रहे तो 36 घंटे के बाद बांध की स्थिति बिगड़ सकती है। बांध में कटान की स्थिति इतनी भयावह है कि लोगों में दहशत आ गई है। इस कारण चरपुरवा गांव को प्रशासन ने पूरी तरह खाली करा लिया है।
ग्रामीणों में सुधा देवी, सुलिया, राम सिंगारे, बहादुर का आरोप है कि उन्हें सिंचाई विभाग के अधिकारी बांध पर शरण नहीं लेने दे रहे हैं और ना ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जमीन दी जा रही है। जिससे बेघर हो चुके करीब 15 परिवारों के सवा सौ की आबादी अभी बाढ़ के पानी में ही बसर करने में के लिए मजबूर है।
इसी एल्गिन चरसड़ी बांध के हिस्से में ग्राम बांसगांव के पास रिसाव भी शुरू हो गया है। जिसे भरने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी तेजी से बोल्डर बालू भरी बोरियां और रोकथाम के प्रयास कर रहे हैं।
बांध में रिसाव को देखते हुए बांसगांव के ठीक सामने गोंडा जिले के गांव घरकुइयां, प्रतापपुर, चरसड़ी तथा बाराबंकी जिले के रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा गांव के ग्रामीणों में जबरदस्त दहशत है। बांध पर मौजूद अवर अभियंता एम के सिंह ने बताया कि बांसगांव के रिसाव को लगभग कंट्रोल कर लिया गया है।
नकहरा के पास अस्थाई रिंग बांध में कटान तेजी से हो रही है। जिसे रोकने के सारे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि घाघरा का जलस्तर घटते समय कटान अधिक कर रही है। यदि पानी घटता रहा तो कटान जारी रह सकती है। फिलहाल अभी तक कोई विशेष खतरा नहीं है।
बांध कटा तो खत्म हो जाएगा नकहरा का अस्तित्व
नकहरा गांव के सामने बांध को बनाने का विरोध ग्रामीणों के लिए भारी पड़ सकता है। घाघरा ने अपना रुख नए अस्थाई बनाये गए रिंग बांध की ओर कर लिया है। जहां अयोध्या प्रसाद के घर के पीछे ही बांध में कटान तेज हो गई है। बताया जाता है कि इसी स्थान पर बांध न बनने देने का विरोध भी हो रहा था। जहां सबसे अंत मे बालू से बांध बना दिया गया।
अगर इस वर्ष बांध कटता है तो बांध से सटी नकहरा ग्राम पंचायत के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा। यहां तक कि इस गांव का अस्तित्व भी समाप्त हो सकता है। इसी तरह से ग्राम रायपुर, बांसगांव के सामने भी बांध की स्थिति बनती जा रही है। बांध में कटान और रिसाव दोनों एक साथ है।
आयुक्त ने घाघरा के उफान की देखी हकीकत
दोपहर बाद कमिश्नर सुदेश कुमार ओझा, डीआईजी देवीपाटन परिक्षेत्र एके राय ने एल्गिन-चरसड़ी बांध का निरीक्षण किया। अस्थाई बांध को भी देखा और घाघरा की उफान को देखते हुए मौके पर मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों को पूरी ताकत से बांध बचाने के उपाय करने के निर्देश दिए।
उन्होंने ग्रामीणों का हालचाल जाना और सिंचाई बाढ़ खंड, राजस्व विभाग सहित एनडीआरफ व आपदा राहत से जुड़े सभी कर्मियों व अधिकारियों को सजग रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाढ़ चौकियों को भी एलर्ट किया है कि वे सारी व्यवस्था मुक्कमल कर लें। यदि बांध कटता है तो पीड़ितों को सुरक्षित निकालने के लिए नावों का सहारा लें और कैंप लगाकर उनके लिए व्यवस्था करें।