गोंडा। जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने सोमवार को जिला पंचायत सभागार में गोवंशों के संरक्षण को लेकर बैठक की। उन्होंने कहा कि जिले में संचालित 60 गोआश्रय स्थलों में उनकी क्षमता के अनुसार गोवंशों का संरक्षण किया जाए। यह ध्यान रखें कि आवारा गोवंश सड़कों पर न घूमने पाएं। गोवंशों की शत-प्रतिशत टैगिंग कराई जाए। गोआश्रय केंद्रों में सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित कराएं।
जिलाधिकारी ने जिला पंचायतराज अधिकारी को ओवरआल नोडल अधिकारी नामित करते हुए निर्देश दिए हैं कि गोवंशों के संरक्षण में जो भी ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव रुचि न लें अथवा सहयोग न करें, उनके खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित करें। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि गोआश्रय स्थलों पर व्यवस्थाओं के संबंध में पंचायत सचिवों, ग्राम प्रधानों तथा पशु पालन विभाग के अधिकारियों द्वारा रुचि नहीं ली जा रही है जिससे गोवंशों का संरक्षण शासन की मंशानुसार नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी ब्लॉकों के बीडीओ व पशुपालन विभाग के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में संचालित गोआश्रय स्थलों का साप्ताहिक निरीक्षण करें। इसकी रिपोर्ट सीडी और फोटोग्राफ्स के साथ उपलब्ध कराएं।
जिलाधिकारी ने कहा कि यदि किसी भी गोआश्रय स्थल में लापरवाही के कारण गोवंश की मृत्यु होती है तो इसके लिए सीधे तौर पर बीडीओ और सहायक पशु चिकित्साधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि गोआश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों का टीकाकरण कराएं। इसके साथ ही हरे चारे की बोआई भी कराएं। गोवंशों का शत-प्रतिशत बंध्याकरण भी कराया जाए। इसके अलावा अभियान चलाकर गोवंशों को संरक्षित कराया जाए।
बैठक में सीडीओ शशांक त्रिपाठी, एसडीएम करनैलगंज हीरालाल, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत राजेश चौधरी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी रवींद्र सिंह राठौर, डीडीओ दिनकर विद्यार्थी, डीसी मनरेगा संत कुमार, डीसी एनआरएलएम नरेश बाबू सविता, जिला कृषि अधिकारी जेपी यादव व जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह उपस्थित रहे।