फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

व्यवस्था में हो सुधार तभी होगा कोरोना पर वार

विज्ञापन
गोंडा के विकास भवन में पानी पीने की टोटी के पास गंदगी का अंबार। - फोटो : GONDA
विज्ञापन
गोंडा। कोरोना जहां एक तरफ पूरे देश में दूसरे चरण में लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है और सरकार इसे लेकर बहुत ही सतर्कता बरत रही है। लेकिन जिले में सबसे अधिक तैयारियों का ढिंढोरा पीटने वाला जिला प्रशासन खुद लापरवाह बना हुआ है। कोई भी सरकारी कार्यालय हो या फिर जिला अस्पताल हर तरफ लापरवाही देखने को मिली। हाल ये है कि बुधवार को खांसी-जुकाम से पीड़ित एक मरीज जांच कराने के लिए दिन भर दौड़ता रहा। बाद में डीएम के हस्तक्षेप के बाद उसकी जांच हुई। वहीं अस्पताल में जरूरी संसाधनों का भी अभाव है। एक तरफ लो जहां खुद कोरोना से अपना बचाव कर रहे हैं और दूसरों को भी जागरूक कर रहें, लेकिन इलाज की जिम्मेदारी का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के लोग खुद संजीदा नहीं हैं। बुधवार को जब तैयारियों की पड़ताल की गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। जो कि अस्पताल और जिला प्रशासन की आंखें खोलने के लिए काफी हैं।
विज्ञापन

आइसोलेसन वार्ड तो बस नाम का
कहने को तो जिला अस्पताल में कोरोना के संदिग्धों को भर्ती करने के लिए 15 बेड का आइसोलसन वार्ड बनाया गया है। लेकिन यहां भी तैयारियों के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। आइसोलेसन तो बस नाम का है, असलियत में ऐसा कुछ भी नहीं है। बताया जा रहा है कि आइसोलेसन वार्ड सामान्य वार्ड से बिल्कुल अलग होता है। लेकिन यहां वार्ड में जाली लगाई गई है। जिससे आइसोलसन वार्ड का संक्रमण अन्य लोगों को होने का खतरा रहेगा। वहीं क्यूरेटाइन वार्ड में भी केवल बेड लगाकर तैयारी पूरी करने का दावा किया जा रहा है।
वार्डों में घूमते मिले मवेशी
साफ-सफाई और अस्पताल परिसर को पूरी तरह से विसंक्रमित करने का दावा करने वाले जिला अस्पताल के हड्डी वार्ड में बुधवार को मवेशी घूमते मिले। कुछ ऐसा ही नजारा जिला अस्पताल में वार्ड के गेट पर भी देखने को मिला। लोगों से बात करने पर पता चला कि वार्ड में केवल सुबह केवल झाड़ू लगाया गया और पोछा लगाया गया। न तो किसी प्रकार की दवा का छिड़काव किया गया और न ही केवल विसंक्रमित करने वाला स्प्रे ही किया गया।
विज्ञापन

जिला अस्पताल में नहीं मास्क और सेनेटाइजर
लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ाने वाले जिला अस्पताल के कर्मचारी और चिकित्सक ही इस समय संकट में हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार को जिला अस्पताल में न तो मास्क मौजूद था और न ही सेनेटाइजर ही स्टाक में था। ऐसे में लोगों से सुरक्षा का दावा करने वाले जिला अस्पताल में ही लोग कैसे सुरक्षित रहेेंगे।
सरकारी दफ्तरों का तो बुरा हाल
जिले विकास की धुरी और लोगों को स्वच्छता की सीखे देने विकास विभाग खुद कितना जागरूक है ये बुधवार को रियल्टी चेक में देखने को मिला। बता दें कि जहां सरकार की ओर से सभी सरकारी दफ्तरों में पूरी साफ-सफाई के साथ ही कार्यालय की सीढ़ियों और फर्नीचर आदि को पूरी तरह से विसंक्रमित करने को कहा गया है, वहीं विकास भवन में चारों तरफ गंदगी देखने को मिली। वो चाहे कार्यालय का शौचालय हो या फिर पानी पीने और हाथ धोने की जगह। सेनेटाइज करने की तो छोड़िए कहीं भी सफाई भी देखने को नहीं मिली।
डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए कोई किट नहीं
जिले के कई इलाके ऐसे हैं कि जहां के लोग ज्यादातर विदेशों में रहते हैं ऐसे में इन जगहों के लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका अधिक है। यदि कोई भी संदिग्ध मरीज जिला अस्पताल आता है तो यहां इनके इलाज के लिए प्रशासन के पास तैयारियां नहीं हैं। हाल ये है कि आइसोलेसन वार्ड के लिए डॉक्टर व कर्मचारी तो तैनात किये गये हैं लेकिन इनके लिए अस्पताल में कोई भी किट मौजूद नहीं है जिसने पहनकर वो कोरोना के मरीजों की देखरेख और इलाज करेंगे। बता दें कि लखनऊ में एक रेजीडेंट डाक्टर के भी कोरोना के मरीज का इलाज करने के दौरान संक्रमण की चपेट में आने की सूचना भी है।
सीएचसी से रेफर मरीज को दवा लिखकर किया रवाना
मनकापुर क्षेत्र के गांव से एक युवक सर्दी, खांसी के साथ बुखार की शिकायत के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंचा था। वहां से डॉक्टरों ने उसे इलाज और चेकअप के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। जहां इमरजेंसी से मरीज को दवा लिखकर भेज दिया गया। वह मरीज अपने स्वास्थ्य की जांच को लेकर परेशान था, लेकिन कोई भी उसकी सुनने वाला नहीं था। सीएमएस डॉ. अरूण लाल को फोन मिलाया गया तो उन्होंने पहले कंट्रोल रूम में सूचना देने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं सीएमओ डॉ. मधु गैरोला का फोन भी नहीं उठा। इस लापरवाही को डीएम डॉ. नितिन बंसल ने गंभीरता से लिया है। डीएम के निर्देश पर जिला अस्पताल में मरीज की जांच की गई और दवा दी गई। डॉक्टरों ने कहा कि अगर गुरुवार को भी बुखार रहता है तो ब्लड सैंपल भेजा जायेगा।
जिला कारागार में कैदियों से मिलने पर रोक
कोरोना के संक्रमण को देखते हुए बुधवार से विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इसमें जिला कारागार में बंदियों से मिलने आने वालों को उनसे मिलने पर रोक लगा दी गई है। सतर्कता के मद्देनजर बंदियों से इंटरकाम पर केवल बात कराई जा रही है। जेल अधीक्षक ने बताया कि शासन की गाइडलाइन के मुताबिक सतर्कता बरती जा रही है। वहीं भाजपा के कार्यक्रम में जिला अस्पताल की टीम ने स्कैनर से लोगों की जांच की।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
जिला अस्पताल में कोरोना से बचाव के लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए। यदि कहीं भी किसी स्तर पर कोई लापरवाही बरती जा रही है तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जायेगी। किसी भी संक्रमण से बचने के लिए जिला अस्पताल में संसाधन होने चाहिए। किसी भी मरीज की पूरी जांच और इलाज मिलना चाहिए। कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। -डॉ. नितिन बंसल, डीएम
अभी भी बरती जा रही है लापरवाही
जिले के भीड़भाड़ वाले स्थानों में अभी लापरवाही बरती जा रही है। बता दें कि शासन की ओर से सभी सिनेमा हाल, माल और जिम जैसे प्रतिष्ठानों को बंद कराने के निर्देश दिये गये थे। लेकिन जिले में सब धड़ल्ले से जारी है। यहां तक कई जगहों पर कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे हैं।
पृथ्वीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगी
खरगूपुर (गोंडा)। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पौराणिक पृथ्वीनाथ मंदिर में भारत सरकार के निर्देशानुसार श्रद्धालुओं के जलाभिषेक, पूजन-अर्चन व दर्शन पर रोक लगा दी गयी है। पृथ्वीनाथ मन्दिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अन्तर्गत संरक्षित स्मारक में से एक है। खरगुपुर से तीन किलोमीटर पश्चिम स्थित पौराणिक पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर ग्राम पंचायत पचरन में स्थित है। यहां प्रत्येक वर्ष कजरीतीज, दशहरा, श्रावण मास के साथ ही हर तीसरे वर्ष मलमास(अधिकमास) व प्रति सोमवार तथा शुक्रवार को गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच आदि जिलों से हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक व पूजन-अर्चन के लिए आते थे। लेकिन कोरोना वायरस का भय यहां भी साफ दिख रहा है।
यहां जलाभिषेक व पूजन अर्चन आदि के लिए मन्दिर परिसर में मौजूद पुष्प, अगरबत्ती, धूप, बेलपत्र आदि की दुकानें भी पूरी तरीके से बन्द कर दी गयी। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए उक्त पृथ्वीनाथ मन्दिर को भारत सरकार के पुरातत्व विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा 17 मार्च से 31 मार्च तक जलाभिषेक व पूजन-अर्चन के लिए बन्द करने का निर्देश दिया गया है। उक्त प्रसिद्ध मंदिर एएसआई संरक्षित स्मारक के अन्तर्गत है। मन्दिर के मुख्य पुजारी जगदम्बा प्रसाद तिवारी ने बताया कि भारतीय पुरातत्व विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार मन्दिर में जलाभिषेक व पूजन अर्चन आदि पर रोक लगाकर गर्भगृह का दरवाजा व मुख्य गेट बंद कर दिये गये हैं। आज यहां कई महिला पुरुष श्रद्धालु पहुंचे लेकिन मन्दिर बन्द होने की सूचना पर निराश होकर वापस लौट गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें