लघु प्रयाग नाम से स्थापित पसका सूकरखेत संगम मेला में दूसरे दिन श्रद्धालुओं का अटूट संगम दिखा। गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, फैजाबाद व बाराबंकी समेत अन्य जिलों से आए श्रद्धालुओं की आस्था यहां हिलोरे मारती रहीं। लोगों ने राष्ट्रीय रामायण मेला में प्रतिभाग किया।
त्रिमुहानी घाट पर स्नान कर पुण्य लाभ कमाया। इसके बाद गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली तथा उनके गुरु नरहरिदास व भगवान वाराह के दर्शन किए।
भगवान वाराह की अवतार स्थली तथा कवि शिरोमणि तुलसीदास के गुरु नरहरिदास के कुटी सूकरखेत पसका, आज-कल लघु प्रयाग के रूप में तब्दील हो गई है।
यहां आए कल्पवासी जहां पुण्य लाभ के साथ अपने-अपने घरों को लौटने लगे हैं। वहीं देवीपाटन मंडल के चारों जिलों सहित दूरदराज व विदेशों से भी श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला जारी है।
रविवार को यहां त्रिमुहानी घाट पर सरयू नदी में लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने भगवान वाराह के मंदिर में मत्था भी टेका। इसके बाद लोगों ने मेले में खरीददारी भी की।
31 साल बाद अपने आराध्य भगवान वाराह की प्रतिमा देख लोगों की आंखें छलक आईं। 31 साल पहले इस मंदिर से भगवान वाराह की मूर्ति चोरी हो गई थी।
बाद में जब बरामद हुई तो खंडित होने के कारण मंदिर में स्थापित नहीं की जा सकी। खंडित अवस्था में मूर्ति होने के कारण ये आज भी जनपद के मालखाने में रखी है।
वहीं 28 दिसंबर 2016 को भगवान वाराह की नई प्रतिमा मंदिर में सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा स्थापित कराई गई और मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया गया। पसका सूकरखेत मेले में भगवान वाराह के दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ जुट रही है।
अयोध्या के 84 कोसी परिक्रमा परिधि में पसका सूकरखेत प्रमुख स्थान है। जब भी 84 कोसी परिक्रमा शुरू होती है। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
लोग त्रिमुहानी घाट पर स्नान करते हैं और गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली व उनके गुरु नरहरिदास के कुटी की परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।