आपदा में अब फसलों के नुकसान होने पर किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से क्षतिपूर्ति मिलेगी। किसानों को खरीफ फसलों में 02 प्रतिशत व रबी की फसलों में 1.50 प्रतिशत प्रीमियम जमा करना होगा।
बीमा का प्रीमियम अधिक होने पर प्रीमियम का अधिक भार सरकार जमा करेगी। सरकार ने पुरानी फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव किया है। पहले बीमा योजना में प्रीमियम की राशि अधिक होने पर बीमित राशि को कम कर दिये जाने की व्यवस्था थी। वहीं इस अब इस बीमा योजना में ऐसी फसलों को भी शामिल किया गया है जो फसलें कट कर खेत में पड़ी होती है।
कटाई के 14 दिन में कटी फसल के नुकसान होने पर भी बीमा कम्पनी क्षतिपूर्ति करेगी। केन्द्र सरकार की ओर से खरीफ फसल 2016 से सभी जिलों में खाद्यान्न तिलहन, आलू व गन्ना की फसलों पर प्रधानमंत्री बीमा योजना लागू की गई है।
खेत में कटी फसलों पर भी मिलेगा बीमा का लाभ
सरकार ने फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब जो फसलें कटने के 14 दिन बाद तक खेत में कटी फसल यदि बारिश, जल प्लावन या तूफान से नुकसान होता है तो उस हानि के लिए भी बीमा कंपनियां क्षतिपूर्ति करेंगी।
ये है स्केल ऑफ फाइनेंस
स्केल ऑफ फाइनेंस किसी फसल के उत्पादन का प्रति हेक्टेयर लागत मूल्य है। यह उत्पाद का बाजार मूल्य नहीं है। स्केल ऑफ फाइनेंस में किसी फसल के लिए खेत की जोताई, बोआई, खाद, बीज, सिंचाई व कटाई मड़ाई के साथ अनाज की पैकिंग करने में आने वाली कुल लागत है जो किसान खर्च करता है।
खरीफ व रबी फसलों पर प्रति हेक्टेयर कुल लागत
फसल - लागत की रकम
धान 46,554
मक्का 22,500
बाजरा 13,129
उर्द/मूंग 17,945
अरहर 18,017
गेहूं 43,650
चना 23,450
मटर 22,350
मसूर 23,350
आलू 90,161
गन्ना 1,20,400
नोट- फसलों के लागत की रकम रुपये में है।
खरीफ सीजन में अनाज, तिलहन आलू व गन्ना की फसलों की आपदा में होने वाले क्षतिपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई है। आपदा में फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कम्पनियों को जिम्मेदारी दी गई है। आपदा का लाभ आसानी से पाने के लिए किसान अपना केसीसी कार्ड अवश्य बनवा लें। ताकि फसलों के बीमा का प्रीमियम कटता रहे।
खरीफ फसलों में 02 प्रतिशत व रबी फसलों को 1.50 प्रतिशत प्रीमियम जमा होगा। जिन किसानों का केसीसी नहीं बना है वे भी आपदा में नुकसान होने पर प्रीमियम जमा करने के लिए अपने बैकों में जमा कराने के लिए आवेदन ब्लॉकवार कृषि विकास अधिकारी को दे सक ते हैं। आपदा में क्षतिपूर्ति की रकम बीमा करने वाली कंपनियों की ओर से किसानों के खाते में भेज दी जाएगी। -विनय कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी गोंडा।