राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में जिले के 57 सौ के करीब मजरों का विद्युतीकरण करने वाली फर्म वैरीगेट को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था। बुधवार को भारत सरकार से आई ऊर्जा मंत्रालय की टीम ने फर्म की ओर से जिले में डंप किए बिजली उपकरणों की जांच कर उनका मिलान किया। इस दौरान टीम के साथ आरजीजीवीवाई के अधिकारी भी मौजूद रहे।
आरजीजीवाई में जिले के 57 सौ के करीब मजरों का विद्युतीकरण किए जाने के का ठेका पावर कॉरपोरेशन ने वैरीगेट नाम की कार्यदायी संस्था को दिया था। मोबलाइजेशन के नाम पर कंपनी को आठ करोड़ रुपये भी एडवांस में दिए गए। ताकि कंपनी गांवों के होने वाले विद्युतीकरण के लिए बिजली के सारे सामान इकट्ठा कर ले।
लेकिन इस दौरान जब कंपनी के अभिलेखों की जांच की गई तो उसमें बैंक गारंटी फर्जी पाई गई। जिसके बाद कंपनी से विद्युतीकरण का काम छीनते हुए कॉरपोरेशन ने उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया। बुधवार को भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय से आई आरईसी (ग्रामीण विद्युतीकरण विभाग) की टीम ने कंपनी की ओर से जिले में डंप किए गए।
तकरीबन साढ़े 6 करोड़ रुपये के सामानों का मिलान किया। इसमें 14 सौ के करीब बिजली के ट्रांसफार्मर, बिजली की एबीसी केबल, इंसुलेटर, क्रासआर्म व अन्य तमाम बिजली उपकरण थे। आरईसी के इंस्पेक्टर वीडी प्रसाद ने बताया कि उन्हें कंपनी के डंप सामानों की जांच के निर्देश मिले हैं। कंपनी जो पैसा जिले से लेकर गई है।
उसके हिसाब से बिजली के सामान यहां मौजूद हैं। जिनकी सूची एक-एक तैयार की जा रही है। इस दौरान उनके साथ आरईसी के प्रदीप कुमार, आरजीजीवीवाई के एसई इंजीनियर डीके सक्सेना, चीफ इंजीनियर हर्ष मुंशी, तीरथराम श्रीवास्तव, राधेश्याम भाष्कर, रामनिहाल वर्मा व अन्य लोग मौजूद रहे।