अमर उजाला में मंगलवार को प्रकाशित लावारिस बच्चों की खबर ने एक बाप से बिछड़े उसके दो बच्चों से मिला दिया। रविवार की रात गोरखपुर इंटरसिटी ट्रेन में लावारिस मिले दोनों बच्चों को जनरल बोगी से उतारकर सोमवार को आरपीएफ ने इन्हें चाइल्ड लाइन की सुपुर्दगी में भेज दिया था। जिसकी खबर उमर उजाला ने मंगलवार के अंक में प्रकाशित की थी। इसे पढ़ने के बाद बस्ती से उनके घर वाले यहां आए। जहां उनकी मुलाकात 20 दिन पहले बिछड़े उनके दो बच्चों से हुई।
संतकबीरनगर निवासी रमेश की शादी पुरानी बस्ती दक्षिण दरवाजा निवासी रामनिहोरे की बेटी शीला से हुई थी। चूंकि रमेश शुरूआत से ही मुंबई में रहकर पेंटिंग करता है, इसलिए उसकी पत्नी शीला और तीन बच्चे अशोक (10), आदर्श (5) और रणवीर (डेढ़ साल) मां के साथ अपने नाना के घर पुरानी बस्ती दक्षिणा दरवाजा में ही रहा करते थे।
बताते हैं कि 20 दिन पहले रमेश के दो बच्चे रणवीर व आदर्श दक्षिण दरवाजा से अचानक मां के साथ गायब हो गए। पुलिस की छानबीन के बावजूद मां का तो कहीं पता नहीं चला, लेकिन मां से बिछड़े उसके दो बच्चे भटकते हुए गोरखपुर इंटरसिटी ट्रेन से गोंडा आ पहुंचे। यहां आरपीएफ को ट्रेन में दोनों बच्चे लावारिस मिले।
पूछताछ में बड़े बच्चे रणवीर ने आरपीएफ को यह बताया था कि वह बस्ती का रहने वाला है और उसके पिता का नाम रमेश है। जिसकी खबर अमर उजाला ने मंगलवार को प्रकाशित की।
इसे पढ़ने के बाद मंगलवार की सुबह बस्ती से उसके नाना-नानी और खुद बच्चे के पिता रमेश गोंडा चले आए। जहां चाइल्ड लाइन ने दोनों बच्चों को बाप की सुपुर्दगी में दे दिया।
बाप को पाकर दोनों बच्चे जहां निहाल हो गए तो वहीं 20 दिन से लापता बच्चों से हुई मुलाकात के बाद सबकी आंखों से आंसू निकल पड़े। रमेश ने इसके लिए अमर उजाला का तहे दिल से आभार जताया है।