गोंडा। जिले में धान खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। खरीद शुरू होने के महीने भर बाद तक लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 10 फीसदी धान खरीद ही हो सकी। जिले में कई किसान अपना धान बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों में बेच चुके हैं।
मूल्य समर्थन योजना के तहत जिले में 107 क्रय केंद्रों के माध्यम से पहली नवंबर को धान खरीद शुरू की गई। छह क्रय एजेंसियों को 98,000 मीट्रिक टन धान खरीद करने का लक्ष्य दिया गया। 2 दिसंबर तक 106 क्रय केंद्रों पर सिर्फ 9311 मीट्रिक टन धान खरीदा जा सका। एक क्रय केंद्र पर अभी तक बोहनी नहीं हुई।
अभी तक 1814 किसान ही सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचने पहुंचे, जबकि करीब तीन लाख किसान धान की खेती करते हैं। माना जा रहा है कि सरकारी केंद्रो पर धान बेचने की जटिल प्रक्रिया के चलते किसान अपना धान बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों में बेच चुके हैं। विपणन विभाग को खरीद का लक्ष्य पूरा करने में मुश्किल होगी।
किसानों को मिली सहूलियत
धान शुरू होने के शुरुआती दिनों में हाईब्रिड धान बेचने आए किसानों से बीज का बिल मांगा जा रहा था। इसके चलते किसानों को लौटना पड़ रहा था। किसानों की समस्याओं को देखते हुए क्रय नीति में संशोधन करते हुए हाईब्रिड धान एक प्रोफार्मा भरकर खरीदा जा सकेगा।
डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि धान की खरीद बढ़ाने के लिए सभी क्रय केंद्र प्रभारियों को सख्त निर्देश दिया जा चुका है। जिस सेंटर पर खरीद कम पाई जाती, उनके प्रभारी से स्पष्टीकरण तलब किया जाता है। इस महीने में खरीद की गति बढ़ने की उम्मीद है।