गोंडा। कोर्ट के आदेश के छह दिन बाद भी परसपुर थाने के एसओ व चार अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है। जेल में बंद युवक की बाइक के स्वामित्व को अंतरित करने के मामले में 12 फरवरी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा रुंगटा ने कोतवाली नगर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। 18 फरवरी की शाम को जब कोतवाल नगर संतोष कुमार मिश्रा से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने इस तरह के किसी आदेश के न मिलने की बात कही है। अभी तक इस मामले में मुकदमा नहीं दर्ज हो सका है।
नवाबगंज थाने के साकीपुर गांव निवासी उमाशंकर शुक्ल ने न्यायालय पर अर्जी दाखिल की थी। कहा कि बेटे विपिन कुमार ने अपने इस्तेमाल के लिए बाइक खरीदी थी। 21 फरवरी 2022 को कुछ पुलिस वाले घर पर आए। अपने को एसओजी से जुड़ा बताते हुए परसपुर थाने पर उसे लेकर चले गए। एक सिपाही उसकी बाइक को लेकर चला गया। आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों ने उसके बेटे को फर्जी मुकदमे में फंसा दिया। बाद में कूटरचित कागज तैयार कर मनोज कुमार पांडेय के नाम 23 फरवरी 2022 को ट्रांसफर करा दिया।
आरोप लगाया गया कि जिस दिन बाइक का स्वामित्व ट्रांसफर किया गया, उस दिन उनका बेटा विपिन जेल में था। जबकि कागजात उसके घर पर थे। इस मामले में न्यायालय ने परसपुर के पूर्व एसओ संदीप सिंह, आरटीओ कार्यालय के लिपिक रमेश कुमार शुक्ल, आरआई संजय कुमार के साथ ही मनोज कुमार पांडेय व लक्ष्मीशंकर पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है।