गोंडा। शिक्षकों के ट्रांसफर में अवैध वसूली के मामले में आखिरकार एफआई दर्ज हो गई है। पुलिस को तीन फरवरी को ही तहरीर मिल गई थी। लेकिन दो दिनों तक पुलिस एफआईआर दर्ज करने से कतराती रही।
जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच टीम के बहाने एफआईआर टालती रही। लेकिन शासन की सख्ती के बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसमें बीईओ ममता सिंह समेत तीन लोगों को आरोपित किया गया है। कोतवाल नगर आलोक राव ने एफआईआर दर्ज करने होने की पुष्टि की है।
शासन से शिक्षकों के गैर जनपद में तबादले हुए थे। जिले में 1085 शिक्षकों का स्थानांतरण बीते साल के अखिरी दिन 31 दिसबंर को ही हो गया था। लेकिन कार्यमुक्ति के लिए पूरे एक महीने तक विभाग को इंतजार करना पड़ा। 31 जनवरी को ही शासन से तबादले वाले शिक्षकों की सूची विभाग को मिली।
इसके बाद एक व दो फरवरी को कार्यमुक्त करने का आदेश आया। दो दिन में ही 1085 शिक्षकों की कार्यमुक्ति करने की पत्रावलियों को तैयार कर कार्यमुक्त करना था। ऐसे में देरी बहुत हो गई और धन उगाही के आरोप भी लगे। वजीरगंज के शिक्षक शिवशंकर सिंह की ओर से एक सूची वायरल हो गई।
जिसमें ट्रांसफर के शिक्षकों से धन उगाही की बात सामने आई और खंड शिक्षा अधिकारी ममता सिंह आरोप लगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत प्रजापति की ओर से भेजी गई रिपोर्ट पर खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित कर दी गईं। सहायक शिक्षा निदेशक विनय मोहन वन ने शासन के अधिकारियों के आदेश पर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया।
3 फरवरी को ही बीएसए ने बीईओ ममता सिंह, प्रधानाध्यापक शिवशंकर सिंह और लेखाकार के खिलाफ एफआईआर की तहरीर नगर कोतवाली में दे दी। इसी बीच जिलाधिकारी ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी। जिसके कारण पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज नही की गई। उधर शासन से लगातार सूचना मांगी जाती रही, एफआईआर दर्ज न होने पर शासन की ओर से नाराजगी जताने के बाद केस दर्ज हो गया। मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक सदर को सौंपी गई है।
वसूली प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब एक और जांच शुरू हो गई है। पुलिस भी पूरे प्रकरण की जांच करेगी। वसूली की सूची जारी होने से तेजी से कार्रवाई होने के कारण पूरी तरह जांच नहीं हो पाई।
जिलाधिकारी ने जांच कमेटी बनाई और बीएसए दफ्तर के भूमिका की जांच कराई है। अब वजीरगंज पुलिस मामले में शिक्षकों के साथ ही अन्य सभी के बयान के आधार पर जांच करेगी। इसके बाद मामले में नया मोड़ आना तय माना जा रहा है।
शिक्षकों से वसूली के मामले में एक शिक्षक की सूची के आधार पर की गई कार्रवाई से खंड शिक्षा अधिकारियों में आक्रोश है। उन लोगों की ओर से एक ज्ञापन भी सौंपा गया है। खंड शिक्षा अधिकारियों ने मांग किया है कि पहले जारी सूची की जांच होनी चाहिए थी।
सूची में शामिल शिक्षकों से बयान लिया जाना चाहिए था। यही नहीं खंड शिक्षा अधिकारी को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। यह सब न करके सिर्फ कार्रवाई कर दी गई। बीईओ के खिलाफ कार्रवाई समाप्त करने की मांग किया है। वहीं एफआईआर दर्ज होने पर भी नाराजगी जताई।