चार मार्च 2018 को गोंडा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने शिकायत की थी कि जिले में 870 मदरसे पंजीकृत हैं, जिनमें से 350 की सिर्फ कागजों में मान्यता दिखाकर फर्जी तरीके से 800 शिक्षकों का मानदेय निकाला जा रहा है। आरोप लगाया था कि जिला विकास अधिकारी कार्यालय के लिपिक शमीम अहमद कई वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में कार्यरत हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह से मिलीभगत कर वह मदरसों के आधुनिकीकरण समेत अन्य योजनाओं के करोड़ों रुपये का गबन कर रहे हैं।
एसीओ के निरीक्षक धनंजय कुमार सिंह की जांच में पता चला कि तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह 21 अप्रैल 2013 से 20 मई 2015 तक जिले में तैनात रहे। उनके कार्यकाल में तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक शमीम अहमद ने नियमों के विपरीत मदरसों को मान्यता दिलाने व पंजीकरण सहित अन्य कार्य कराए थे। इस अवधि में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत 357 मदरसों की पत्रावली निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को भेजी गई थी।
एसीओ ने माना कि शमीम अहमद ने मदरसा आधुनिकीकरण योजना से संबंधित 357 पत्रावलियों एवं डिस्पैच रजिस्टर को अपने पास रखा था। कई बार पत्राचार के बाद भी अभिलेख नहीं दिए। वर्ष 2018 में आरोपी शमीम अहमद का एटा में स्थानांतरण हो गया। मगर उसने न संबंधित कार्यालय में अपना चार्ज सौंपा और न ही नवीन तैनाती वाले कार्यालय में पदभार ग्रहण किया। ऐसे में जांच कमेटी को जरूरी दस्तावेज नहीं मिल सके।
एसीओ के धनंजय सिंह ने बताया कि अयोध्या के गोसाईंगंज राजापुर सरैया देवरा निवासी तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (वर्तमान में समाज कल्याण विभाग लखनऊ के उपनिदेशक) अमरजीत सिंह व लिपिक शमीम अहमद निवासी मुन्नन खां चौराहा सद्भावना पुलिस चौकी, थाना कोतवाली नगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
हमारी तो कोई भूमिका ही नहीं
समाज कल्याण विभाग निदेशालय में तैनात उपनिदेशक अमरजीत सिंह ने कहा कि मैं गोंडा में पहले जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रहा। शमीम से हमारा कोई मतलब ही नहीं है। न ही कोई हमारा रोल है। जांच टीम ने जब भी मुझसे जानकारी मांगी, उसे दिया गया। मुकदमा दर्ज होने की जानकारी नहीं है।
अभी डॉक्टर के पास जा रहे हैं, बाद में बात करेंगे
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र से जब इस बारे में जानकारी चाही गई तो वह बोले अभी हम डॉक्टर को दिखाने जा रहे हैं। इस बारे में ऑफिस आइए...फिर बात करेंगे। मदरसा शिक्षकों को कितना मानदेय दिया जा रहा था। इस सवाल पर उन्होंने बोलने से इन्कार कर दिया।