बालपुर। अम्मी… मेरा नाम स्कूल में भले ही न दर्ज हो। मैं घर पर ही पढ़ाई कर एकदिन बड़ा अफसर बनूंगा। काॅपी लेने बाजार जा रहा हूं, आऊंगा तो खूब मेहनत से पढ़ाई करूंगा... घर से निकलते वक्त फैजान के यही आखिरी शब्द थे। किसी को क्या पता था कि पढ़ाई का सपना आंखों में लिए साइकिल से काॅपी लेने बाजार गया 14 वर्षीय किशोर वापस कभी नहीं लौटेगा। गोंडा लखनऊ मार्ग पर बालपुर जाट के तिवारी पुरवा मोड़ के पास रोडवेज बस की चपेट में आकर फैजान की मौत हो गई। फैजान के पिता इस्तखार बिलखते हुए एक ही रट लगा रहे थे कि गरीबी ने पहले ही गला घोंट रखा था, अब बुढ़ापे का सहारा भी छिन गया।
लक्ष्मणपुर जाट के फकीरन पुरवा निवासी मो. इस्तखार का बेटा फैजान पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर था। गरीबी उसकी राह में जरूर थी, लेकिन उसके हौसले मजबूत थे। स्कूल में नामांकन नहीं हो सका, फिर भी वह घर पर ही किताबों से रिश्ता निभा रहा था। बुधवार को वह बालपुर बाजार कॉपी लेने गया था। लौटते समय तिवारी पुरवा मोड़ के पास पीछे से आ रही कैसरबाग डिपो की रोडवेज बस की चपेट में आ गया। हादसे में फैजान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना जैसे ही खबर घर पहुंची, मां अनीसा बानो बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़ीं। बड़ी बहन आफरीन की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वह बार-बार यही कहती रही कि भैया बहुत मेहनती था, पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहता था। पिता मो. इस्तखार मुंबई में मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही वह टूट गए हैं। परिवार की आर्थिक हालत पहले ही कमजोर थी, अब सहारे का वह हाथ भी छिन गया, जिससे घर की उम्मीदें जुड़ी थीं।
हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। सड़क पर चीख-पुकार गूंज उठी। कई लोगों की आंखें नम हो गईं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और यातायात बहाल कराया।
रोडवेज बस को कब्जे में ले लिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। चालक की तलाश की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मृतक के चाचा सईद मोहम्मद ने तहरीर दी है।
-शमशेर बहादुर सिंह, प्रभारी निरीक्षक