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500 ग्राम पंचायतों के आरक्षण की बदलेगी सूरत

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गोंडा। जिले में 474 नई पंचायतों के पुनर्गठन पर मंथन शुरू हो गया है। इसी के साथ ही अब पंचायतों के आरक्षण के तरीके पर भी लोगों की निगाहें टिक गई हैं। माना जा रहा है कि इस बार 1054 पंचायतों से बढ़कर 1300 के करीब नई पंचायतों का होना करीब-करीब तय है। ऐसे में आरक्षण में बड़े बदलाव होंगे। 500 से अधिक पंचायतों के आरक्षण की सूरत बदलनी तय मानी जा रही है। वर्तमान में 500 प्रधानों के आरक्षण बदलने के आसार दिख रहे हैं। पंचायत चुनाव आरक्षण के आधार पर ही होने हैं और अब पुनर्गठन की कार्रवाई आगे बढ़ने से साफ हो गया है कि दिसंबर मे परिसीमन तय होने के साथ ही आरक्षण की कवायद भी शुरू हो जाएगी।
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जिले के 1054 पंचायतों में 1044 में पंचायत चुनाव होने की तैयारी निर्वाचन विभाग कर रहा है। पंचायत निर्वाचन के सहायक अधिकारी नारायन कहते हैं कि अभी पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण की कार्रवाई तो सभी पंचायतों में हो रही है लेकिन 10 पंचायतों का कार्यकाल अभी बाकी है, ऐसे में वहां चुनाव नहीं होंगे। इसके अलावा नई पंचायतें जो गठित होंगी, वहां चुनाव होगा। फिलहाल अभी पुनर्गठन की कार्रवाई हो ही रही है। इसके बाद आरक्षण तय करने की कार्रवाई भी पंचायत राज विभाग की है। इसके बाद ही चुनाव होंगे। इस तरह निर्वाचन विभाग तो तैयारी कर ही रहा है, पंचायत राज विभाग भी तैयारी में जुटा है। पंचायतों के पुनर्गठन होने के बाद जिले में पंचायतों की संख्या 1300 से अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी के आधार पर आरक्षण होगा और मौजूदा समय में आरक्षित वर्ग या फिर दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित करीब 500 पंचायतों के आरक्षण की तस्वीर बदलनी तय हैं। यह अलग बात है कि अनारक्षित सीटों पर दूसरे वर्ग के लोगों को तो चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा लेकिन आरक्षित श्रेणी की पंचायत में अनारक्षित वर्ग के प्रत्याशी चुनाव नही लड़ पाएंगे।
2015 के बाद आरक्षण का यह दूसरा चक्रानुक्रम है
पंचायत चुनाव की तैयारियां के साथ ही गांवों में आरक्षण की चर्चाएं भी आम हो रही हैं। गांवों में इस बात पर चर्चा हो रही है कि कौन सा गांव आरक्षित होगा और कौन सा नहीं। वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण नए सिरे से हुआ था। यह मानकर नए सिरे से आरक्षण हुआ कि 2010 के चुनाव में आरक्षण पूरा हो चुका है, इसलिए नए सिरे से आरक्षण किया गया था। चुनावी विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 2015 के चुनाव के बाद इस बार अब चक्रानुक्रम आरक्षण का यह दूसरा चक्र होगा। चक्रानुक्रम आरक्षण का अर्थ यह है कि आज जो सीट जिस वर्ग के लिए आरक्षित है, वो अगले चुनाव में वह सीट उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होगी। चक्रानुक्रम के आरक्षण के वरीयता क्रम में पहला नम्बर आएगा एसटी महिला, एसटी की कुल आरक्षित सीटों में से एक तिहाई पद इस वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। बाकी बची एसटी की सीटों में एसटी महिला या पुरुष दोनों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं। एससी के 21 प्रतिशत आरक्षण में से एक तिहाई सीटें एससी महिला के लिए आरक्षित होंगी और फिर एससी महिला या पुरुष दोनों के लिए होगा। फिर ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण में एक तिहाई सीटें ओबीसी महिला के लिए तय होंगी, फिर ओबीसी के लिए आरक्षित बाकी सीटें ओबीसी महिला या पुरुष दोनों के लिए अनारक्षित होंगी। अनारक्षित में भी पहली एक तिहाई सीट महिला के लिए होगी।
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प्रधान के लिए आरक्षण तय करने में ब्लॉक की आबादी है आधार
पंचायतों के आरक्षण तय करने का आधार ग्राम पंचायत सदस्य के लिए गांव की आबादी होती है। वहीं ग्राम प्रधान का आरक्षण तय करने के लिए पूरे ब्लॉक की आबादी आधार बनती है। इसी तरह ब्लॉक में आरक्षण तय करने का आधार जिले की आबादी और जिला पंचायत में आरक्षण का आधार प्रदेश की आबादी बनती है। इसी तरह आरक्षण तय होने की इस बार उम्मीद है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए किसी एक विकास खंड में 100 ग्राम पंचायतें हैं। वहां 2015 के चुनाव में शुरू 27 ग्राम प्रधान पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे, अब इस बार के पंचायत चुनाव में इन 27 के आगे वाली ग्राम पंचायतों के आबादी के अवरोही क्रम में (घटती हुई आबादी) प्रधान पद आरक्षित होंगे। इसी तरह 2015 के चुनाव में शुरू की 21 ग्राम पंचायतों के प्रधान के पद एससी के लिए आरक्षित हुए थे तो अब इन 21 पदों से आगे वाली ग्राम पंचायतों के पद अवरोही क्रम में एससी के लिए आरक्षित होंगे।
नई पंचायतों के गठन से नए सिरे से संभव है आरक्षण
प्रदेश के सभी जिलों में तो नई पंचायतों का गठन नहीं हो रहा है लेकिन जिले में नई पंचायतों का गठन हो रहा है। ऐसे में नए सिरे से पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था भी लागू होने की संभावना है। पंचायतों के बढ़ने से नए सिरे से आरक्षण की व्यवस्था लागू होने का फैसला हुआ तो जिले में चक्रानुक्रम के दूसरे चरण की प्रक्रिया लागू होने की उम्मीद कम है। वैसे शासन स्तर पर पंचायतों के पुर्नगठन के बाद ही आरक्षण का फैसला होने के आसार हैं। गावों में आरक्षण को लेकर नियमों की चर्चाओं के साथ ही कई संभावनाओं पर विचार - विमर्श हो रहा है।
जिले में पंचायतों के पुनर्गठन की कार्रवाई की जा रही है। 13 दिसंबर तक पंचायतों के पुनर्गठन की कार्रवाई पूरी हो जाएगी। इसके बाद ही आरक्षण के बारे में प्रक्रिया शुरू होगी। अभी आरक्षण के बारे में कोई आदेश नही मिले हैं, जैसा आदेश मिलेगा प्रक्रिया की जाएगी। -सभाजीत पांडे, जिला पंचायत राज अधिकारी
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