गोंडा। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में जीत का झंडा बुलंद करने के बाद अब ब्लॉक प्रमुख चुनाव की सियासत तेज हो गई है। 16 ब्लाकों में से 15 ब्लाकों में चुनाव होने हैं, अभी तिथि तय नही है।
इसके बाद भी क्षेत्र पंचायत सदस्यों को पक्ष में करने की मुहिम चल रही है। वोट के लिए बीडीसी को पक्ष में लाने के लिए बोली लगने लगी हैं। परसपुर ब्लाक में सबसे अधिक बोली पहुंच गई है। यहां से दो नेताओं में जोर आजमाइश से क्षेत्र पंचायत सदस्यों की बल्ले- बल्ले हैं। वहीं रूपईडीह में सपा व भाजपा आमने- सामने आ गए हैं।
15 ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भाजपा की निगाहें 14 ब्लॉकों पर टिकी है। वैसे वह सभी ब्लाकों पर अपने समर्थित प्रत्याशी को जिताने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि एक ब्लॉक सपा के खाते में जा सकती है। इसके लिए बड़े स्तर पर डील भी हो रही है। जिससे कोई सवाल न उठा सके, वहीं रूपईडीह ब्लॉक में सपा व भाजपा में शुक्रवार को ही भिड़ंत हो गई है।
इसके बाद ब्लॉक प्रमुख की सियासत गर्मा गई है। परसपुर में नेताओं की गणेश परिक्रमा करने के बाद वहां के दो नेता बीडीसी को पटाने में जुटे हैं। सोशल मीडिया पर जो सूचनाएं तैर रही हैं, उसके अनुसार सबसे अधिक रेट परसपुर में ही है। माना जा रहा है कि यहां पर दोनों ने चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ रखा है और दोनों स्थानीय नेताओं के करीबी हैं।
ऐसे में कोई मानने को तैयार नहीं हैं, फिलहाल कोशिश यहां भी हो रही है। पंडरीकृपाल में भी चुनावी घमासान शुरू हो गया है। सदर विधायक के एक करीबी नेता पूरी ताकत से जुटे हैं और हर स्तर पर फिर ब्लाक पर अपने समर्थक को बैठाने में जुटे हैं।
वहीं सपा नेता के रिश्तेदार और भाजपा में पहले से शामिल एक पूर्व ब्लाक प्रमुख ने मैदान में उतर कर माहौल को गरमा दिया है। इससे यहां भी क्षेत्र पंचायत सदस्यों का भाव बढ़ गया है। बभनजोत में वर्तमान भाजपा विधायक के परिवार से और पूर्व विधायक के परिवार के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। देखना है कि किसके पाले में सीट जाती है।
नवाबगंज में कोई सामने नही दिख रहा है और वजीरगंज में दांवपेंच चल रहा है। करनैलगंज, हलधरमऊ और कटरा में ज्यादा शोर नहीं है, लेकिन गुपचुप कुछ हो रहा है। झंझरी में निवर्तमान प्रमुख फिर से मैदान में पूरी मजबूती से जुटे हैं और ज्यादातर उन्हीं का शोर है।
इसी तरह छपिया और मनकापुर में सब तय बताया जा रहा है। बेलसर का मामला फंसा हुआ है, भाजपा के ही दो लोग जोर लगाए हैं। प्रमुख प्रतिनिधि पप्पू सिंह परास के निधन के बाद यहां संवेदना से फैसला लेने की सुगबुगाहट है। फिलहाल एक बड़े नेता के करीबी काफी तेजी से पहले ही कदम बढ़ा चुके हैं। यहां चुनाव स्थानीय प्रबंधन पर टिका है।
इनसेट
सत्तापक्ष में गुटबाजी का एक बार फिर दिखेगा असर
-सत्तापक्ष हर हाल में सभी ब्लाकों पर अपने समर्थित प्रत्याशी को जिताने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि पूरे जिले के चुनावी प्रबंधन में एक सीट दूसरे दल के खेमे को जा सकता है। लेकिन आसानी से सीट किसी को न मिलने पाए, इसका रिहर्सल शुक्रवार से शुरू हो गया है। हाथ पर हाथ धरे बैठी सपा अब चर्चा में आ गई है। माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष में गुटबाजी के दांवपेंच का असर एक बार दिखेगा और कई सीटों पर तनाव दिख रहा है। फिलहाल सियासत के माहिर नेता के दरबार से होने वाले फैसले पर सभी की निगाहें टिकी है।