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दिव्यांगता को मात दे अपनाया जीने का तरीका

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गोंडा में गुरसड़ा निवासी दीपक जो दिव्यांग होकर भी चला रहा रिक्शा। - फोटो : GONDA
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करनैलगंज (गोंडा)। मुफ़लिसी की मार झेल रहे एक दिव्यांग युवक ने हार नहीं मानी और रिक्शा चला कर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि दिव्यांग हुआ तो क्या हुआ। जब हौसले बुलंद हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
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तहसील क्षेत्र के ग्राम गुड़सड़ा परसा महेशी निवासी दीपक कुमार दिव्यांग हो चुके अपने दाहिने हाथ को गमछे में लटकाये हुये एक हाथ से सवारी भरा रिक्शा लिये परसपुर मार्ग पर जा रहा था। उसे रोकते ही वह अपनी दर्द भरी कहानी सुनाने लगा। साहब हमारे दोनों हाथ सही थे, 7 वर्ष पूर्व शादी होने के बाद वह सुखी जीवन बिताने के लिये काम धंधा के बारे में सोचने लगा। गरीबी के कारण घर से उसे कोई सहायता नहीं मिल सकी। जिससे पांच वर्ष पूर्व वह रोजी रोटी के लिये दिल्ली जा रहा था। शहदरा रेलवे स्टेशन पर उतरते समय वह नीचे गिर गया और उसका दाहिना हाथ ट्रेन के नीचे कट गया।
उसके भाइयों ने 6 माह तक उसका इलाज करवाकर उसे स्वस्थ करा दिया। मगर अब उसके सामने समस्याओं के बादल छाने लगे थे। आर्थिक विपन्नता के कारण उसके दोनों भाई अलग हो गये, माता पिता भी वृद्ध हो चुके थे, परिवार में पत्नी के अलावा एक छोटा बच्चा था। स्थिति को देखकर वह समय की गति के साथ तालमेल बनाकर चलने लगा।
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तीन वर्ष पूर्व किसी तरह उसे किराये पर रिक्शा मिला। जिसे चलाने का वह प्रयास करने लगा। यहीं उसके परिवार के भरण पोषण का जरिया बन गया। प्रयास करने पर उसे पेंशन भी मिलने लगा। दीपक ने बताया कि उसका पुत्र अजीत अब पांच वर्ष का हो गया है। जिसे वह ट्यूशन पढ़वा रहा है। उसकी दिली इच्छा है कि वह बच्चे के पढ़ाई में कोई बाधा नही आने देगा। उसे पढ़ा लिखा कर वह दरोगा बनाने का सपना देख रहा है।
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