शिक्षा व साहित्य को अशिक्षितों से नहीं बल्कि पढ़े-लिखे लोगाें से ही ज्यादा खतरा है। समाज में मौजूद इन पढ़े-लिखे अशिक्षितों ने हिंदी को नुकसान पहुंचाया है। ये दर्द जिले के एक युवा साहित्यकार का है जो रविवार को लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में छलक पड़ा। कार्यक्रम में हिंदी साहित्य की आठ पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के तुलसी सभागार में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष शैलेंद्र नाथ मिश्र ने रविवार को ‘वैश्विक चुनौतियां एवं हिंदी साहित्य’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया।
इसमें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. छोटेलाल दीक्षित व नारायण जी शुक्ल को वरिष्ठ पत्रकार सूर्य प्रसाद मिश्र ने सम्मान पत्र व शॉल देकर सम्मानित किया। संगोष्ठी में डॉ. छोटेलाल दीक्षित ने युवा साहित्यकारों को साहित्य की विद्या को बचाए रखने के तरीके सुझाए।
युवा साहित्यकार अजय मिश्र अजर ने हिंदी साहित्य की वैश्विक चुनौतियों पर बोलते हुए कहा कि आज के समय में पढे़-लिखे लोग ही हिंदी साहित्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं और ऐसे ही कुशिक्षितों से हिंदी साहित्य को सबसे अधिक खतरा है।
संगोष्ठी में डॉ. छोटेलाल दीक्षित की पुस्तक संशय के घेरे, महात्मा बुद्ध के विचार व बंगला भाषा के कवि और उनका काव्य, सूर्यपाल सिंह की ओ सेमल के तोते, अजय मिश्र अजर की रोशनी की तलाश में, यज्ञराम मिश्र यज्ञेश की हारता है कब यहां मन, डॉ. उमा सिंह की पुस्तक पंखुड़ी व राम कुमार नवीन की पुस्तक नारायण नारायण का विमोचन किया गया।