गोंडा। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय ने रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार उपनिरीक्षक सुभाष चंद्र चौहान की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए राहत देने से इन्कार कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता राम हुकुम मौर्य ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की थी कि बहराइच के रिसिया थाने में तैनात उपनिरीक्षक सुभाष चंद्र चौहान ने उनके खिलाफ दर्ज छेड़छाड़ के मुकदमे में गंभीर धाराएं न बढ़ाने और जेल न भेजने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में सौदा पांच हजार रुपये में तय हुआ। शिकायत के आधार पर नौ जून 2026 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने जाल बिछाया। आरोप है कि रिश्वत लेने के बाद उपनिरीक्षक को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान पांच हजार रुपये उनके बिस्तर के नीचे से बरामद किए गए। जमानत अर्जी में आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया। अभियोजन पक्ष ने विरोध किया। विशेष न्यायाधीश नित्या पांडेय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उपनिरीक्षक सुभाष चंद्र चौहान की जमानत अर्जी खारिज कर दी। (संवाद)