कहीं लोग एटीएम बंद होने से पैसे न मिलने से दुखी हैं तो कहीं बैंक में कैश खत्म होने से। किसी के खेती-किसानी का काम पैसों के चलते रुका पड़ा है तो कहीं किसी घर में साग-सब्जी के लिए भी पैसा नहीं है। बीते 10 दिनों से जो हालात नोट बंदी के चलते लोगों के सामने हैं, उससे उन्हें कब निजात मिलेगी और मिलेगी भी या नहीं। यह बताने वाला कोई नहीं है।
सरकार ने हजार, पांच सौ के नोट क्या बंद किए। आम लोगों पर मानों जैसे मुसीबतों का पहाड़ मानो टूट पड़ा हो। वजीरगंज और आसपास के तमाम बैंक शनिवार को बंद रहे। जबकि कुछ बैंकों में कैश की कमी के चलते लोग अपना पैसा नहीं निकाल पाए। इस बारे में जब कुछ ग्रामीणों ने बातचीत की गई तो उनका दर्द कुछ इस तरह सामने आया। कोमर निवासी राजू ने बताया कि घर में कई जरूरी काम होते हैं। जिसके लिए पैसा चाहिए होता है।
एटीएम से पैसा निकालने गए तो वह बंद था, फिर सोचा लाओ बैंक से निकाल लें तो पता चला कि बैंक में कैश खत्म हो गया है। जबकि वह सुबह से ही लाइन में था और पूरा दिन उसी में लगे-लगे बीत गया। कल रविवार को छुट्टी पड़ रही है। इसलिए बैंक तो अब सोमवार को ही खुलेगा।
वजीरगंज की कई बैंकों का हाल कमोवेश कुछ ऐसा ही है। यहां लोगों को एक-एक पैसे के लिए परेशान होना पड़ रहा है। एटीएम के बाहर भोर होते ही लंबी-लंबी लाइन लग जाती है। जबकि बैंक में भी इतनी भीड़ हो रही है कि एक आदमी का कैश काउंटर तक पहुंच पाना बड़ा ही मुश्किल है। कस्बे के बुद्धिजीवी वर्ग की मानें तो सरकार को इसके लिए कुछ और इंतजाम करने चाहिए। जिससे कि हर किसी को कैश मिल सके।