गोंडा। उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की गोंडा शाखा में 21.47 करोड़ रुपये के ऋण वितरण और खातों से धनराशि के गबन के आरोपियों के वाहन समेत 5.94 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित संपत्ति कुर्क की जाएगी। इस संबंध में पुलिस के प्रार्थनापत्र पर सीजेएम अमित कुमार सिंह ने आदेश दिए हैं। पुलिस अब आरोपियों की संपत्ति कुर्क करके नीलामी कराएगी।
बैंक के सहायक महाप्रबंधक/मुख्य प्रबंधक भुवन चंद्र सती ने दो जनवरी को नगर कोतवाली में तहरीर देकर शाखा में ऋण वितरण के दौरान गंभीर अनियमितता और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। स्पेशल ऑडिट की अंतरिम रिपोर्ट और गठित समिति की संस्तुतियों के परीक्षण में तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल पर बैंककर्मियों और खाताधारकों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से जालसाजी करने का आरोप लगा।
जांच में सामने आया कि बैंक की नीति तथा आरबीआई व नाबार्ड के दिशा-निर्देशों के विपरीत ऋण स्वीकृत और वितरित किए गए। आरोप है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने अपने परिजनों और गिरोह के लोगों को बिना पात्रता व आवश्यक अभिलेखों के ऋण दिलाए। फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के सहारे 205 खाताधारकों के ऋण व बचत खातों तथा पांच आंतरिक खातों से कुल 2147.78 लाख रुपये का विभिन्न बैंकिंग माध्यमों से गलत इस्तेमाल किया गया। इनमें पांच आंतरिक खातों से 46.13 लाख रुपये अनधिकृत रूप से निकालने का भी आरोप है।
मामले में नगर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कर तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल को 18 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद खाताधारक राघवराम और शिवाकांत वर्मा को 22 फरवरी तथा सहायक शाखा प्रबंधक सुशील कुमार गौतम को 19 मई को गिरफ्तार किया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपियों की अपराध से अर्जित संपत्तियों को चिह्नित कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107(1) के तहत कुर्की और जब्तीकरण के लिए न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपियों के वाहन सहित 5.94 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है। सीओ सिटी योगेंद्र सिंह ने बताया कि संपत्तियों को कुर्क करके जल्द ही नीलामी कराई जाएगी।